महास्नान के बाद 15 दिनों तक नहीं होंगे प्रभु जगन्नाथ के दर्शन, जानें क्या है अनासर काल

महास्नान के बाद 15 दिनों तक नहीं होंगे प्रभु जगन्नाथ के दर्शन, जानें क्या है अनासर काल

महास्नान के बाद 15 दिनों तक नहीं होंगे प्रभु जगन्नाथ के दर्शन, जानें क्या है अनासर काल
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 29, 2026, 11:30:00 AM

 ज्येष्ठ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सोमवार को जगन्नाथपुर मंदिर में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक स्नान यात्रा पूरे धार्मिक उल्लास और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित की जाएगी। इस विशेष आयोजन को लेकर मंदिर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की संभावना को देखते हुए पूजा व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के जल से विधिवत अभिषेक किया जाता है। महास्नान के बाद तीनों विग्रहों का विशेष श्रृंगार किया जाएगा और पारंपरिक पूजा-अर्चना संपन्न होगी।

हिंदू परंपरा में यह भी माना जाता है कि इस स्नान अनुष्ठान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं। इसी कारण वे कुछ दिनों तक भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं देते। इस अवधि को अनवसर (अनासर) काल कहा जाता है। इसके पश्चात भगवान रथयात्रा के दिन पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसका श्रद्धालु पूरे वर्ष इंतजार करते हैं।

मंदिर परिसर में सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और महाप्रसाद वितरण का आयोजन होगा। पूरे मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जबकि श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है। मंदिर प्रबंधन समिति ने श्रद्धालुओं से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने और शांतिपूर्ण तरीके से धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने की अपील की है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर आयोजित होने वाली स्नान यात्रा को भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा का प्रारंभिक और अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। इसी आयोजन के साथ रथयात्रा महोत्सव की औपचारिक शुरुआत होती है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था का माहौल बना हुआ है।