झारखंड में बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। गोवा से गिरफ्तार किया गया छत्तीसगढ़ का शराब कारोबारी नवीन केडिया जमानत की अवधि समाप्त होते ही फरार हो गया है। इसके बाद झारखंड एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने उसकी तलाश तेज कर दी है और छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में लगातार छापेमारी की जा रही है।
एसीबी की टीम ने छत्तीसगढ़ पुलिस के सहयोग से दुर्ग के नेहरू नगर स्थित नवीन केडिया के आवास और कुम्हारी इलाके में स्थित उसकी शराब फैक्ट्री पर दबिश दी। हालांकि, दोनों ही ठिकानों पर आरोपी का कोई सुराग हाथ नहीं लग सका। नवीन केडिया छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी नामक देसी शराब निर्माता कंपनी का संचालक बताया जाता है।
गौरतलब है कि एसीबी ने नवीन केडिया को आठ जनवरी को गोवा के कैलेंगुएट थाना क्षेत्र में एक स्पा सेंटर से उस वक्त गिरफ्तार किया था, जब वह मसाज करा रहा था। इसके बाद नौ जनवरी को उसे ट्रांजिट रिमांड के लिए गोवा के मर्सेस तिसवाड़ी कोर्ट में पेश किया गया था। अदालत ने उसे कुछ सख्त शर्तों के साथ 12 जनवरी तक अंतरिम जमानत दी थी।
अदालती आदेश के अनुसार, जमानत अवधि समाप्त होते ही नवीन केडिया को रांची स्थित एसीबी के अनुसंधान पदाधिकारी के समक्ष शराब घोटाला केस (कांड संख्या 09/2025, दर्ज 20 मई 2025) में उपस्थित होना था। लेकिन इस दौरान उसने एसीबी के सामने पेश होने के बजाय विशेष अदालत, रांची में अपने वकील के माध्यम से नियमित जमानत की अर्जी दाखिल कर दी और खुद कहीं गायब हो गया।
अब उसकी फरारी के बाद एसीबी झारखंड ने उसकी तलाश का दायरा बढ़ा दिया है। दुर्ग जिले में चल रही छापेमारी की पुष्टि करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि फिलहाल आरोपी का कोई ठोस पता नहीं चल पाया है।
नवीन केडिया दुर्ग जिले के ईस्ट भिलाई स्थित मोतीलाल नेहरू नगर का निवासी है। गोवा की अदालत ने उसे नौ से 12 जनवरी तक की जमानत देते हुए कई शर्तें लगाई थीं। इनमें पांच लाख रुपये का बेल बांड भरना, बिना अनुमति देश से बाहर न जाना और झारखंड एसीबी के अनुसंधानकर्ता के समक्ष आत्मसमर्पण करना शामिल था।
एसीबी के अनुसार, नवीन केडिया पर आरोप है कि उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में मई 2022 में लागू की गई उत्पाद नीति के दौरान उसे छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े सिंडिकेट के माध्यम से झारखंड में कारोबार मिला। उसकी कंपनी द्वारा निर्मित देसी शराब में शीशे के कण पाए जाने का मामला भी सामने आ चुका है।
एसीबी की योजना आरोपी से झारखंड में देसी शराब आपूर्ति का ठेका मिलने, पूर्व उत्पाद नीति में उसकी भूमिका और अन्य संदिग्ध बिंदुओं पर विस्तृत पूछताछ करने की है। फिलहाल, फरार कारोबारी की गिरफ्तारी एसीबी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।