KVIC घोटाला: 3.89 करोड़ की हेराफेरी में ED की बड़ी कार्रवाई, 6 पर चार्जशीट

KVIC घोटाला: 3.89 करोड़ की हेराफेरी में ED की बड़ी कार्रवाई, 6 पर चार्जशीट

KVIC घोटाला: 3.89 करोड़ की हेराफेरी में ED की बड़ी कार्रवाई, 6 पर चार्जशीट
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 26, 2026, 12:54:00 PM

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), रांची से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए छह लोगों के खिलाफ अभियोजन पत्र दाखिल कर दिया है। यह चार्जशीट रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में प्रस्तुत की गई, जहां अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

जिन लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है, उनमें KVIC रांची के तत्कालीन कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार, वरिष्ठ कार्यपालक अधिकारी (प्रशासन एवं एचआर) अमन कुमार, साथ ही शाहिल, प्रिया, बिनोद कुमार बैठा और बंकु निषाद शामिल हैं।

यह मामला मूल रूप से सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी से सामने आया था। KVIC के एक वरिष्ठ अधिकारी की शिकायत के बाद 2016 से 2018 के बीच हुए वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू हुई थी। विभागीय जांच में गड़बड़ी उजागर होने पर केस सीबीआई को सौंपा गया। जांच के दौरान यह सामने आया कि तत्कालीन उप निदेशक आरबी राम (जो अब जीवित नहीं हैं) और सुनील कुमार ने मिलकर नियमों की अनदेखी करते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

ईडी की जांच में एक संगठित साजिश का खुलासा हुआ, जिसमें एक फर्जी कंपनी बनाकर सरकारी योजनाओं की राशि को हड़पा गया। यह कंपनी नकली कॉरपोरेट पहचान संख्या (CIN) के सहारे संचालित की जा रही थी। खादी रिफॉर्म एवं डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत जारी करीब 3.89 करोड़ रुपये बिना किसी वास्तविक कार्य के निजी खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपितों ने पैसे के स्रोत को छिपाने के लिए रिश्तेदारों के बैंक खातों और पहले से हस्ताक्षरित खाली चेक का इस्तेमाल किया। विभिन्न खातों के माध्यम से धन को घुमाकर उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई, जो मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा था।

इसके अलावा, सुनील कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी सुनीता देवी के नाम पर ओरमांझी क्षेत्र में जमीन खरीदी और रजिस्ट्री के दौरान उसकी वास्तविक कीमत कम दर्शाई, ताकि निवेश का सही स्रोत छिपाया जा सके।

ईडी इससे पहले भी इस मामले में कार्रवाई कर चुकी है। मार्च 2025 में कई स्थानों पर छापेमारी की गई थी। इसके बाद अप्रैल 2025 में 71.91 लाख रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं, जिनमें बैंक खातों में जमा राशि और ओरमांझी स्थित दो भूखंड शामिल थे। साथ ही, एक ट्रस्ट से जुड़े 31.11 लाख रुपये भी जब्त किए गए। अब तक कुल 1.02 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है, जिसे संबंधित प्राधिकरण से मंजूरी भी मिल चुकी है।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इस बहुचर्चित घोटाले की सुनवाई विशेष अदालत में होगी। ईडी का मानना है कि यह पूरा मामला सुनियोजित आर्थिक अपराध का उदाहरण है, जिसमें कई लोगों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।