रामगढ़ से कुसुमलता की बड़ी जीत, जुगसलाई में नौशीन खान और झुमरी तिलैया में रमेश हर्षधर बने अध्यक्ष

रामगढ़ से कुसुमलता की बड़ी जीत, जुगसलाई में नौशीन खान और झुमरी तिलैया में रमेश हर्षधर बने अध्यक्ष

रामगढ़ से कुसुमलता की बड़ी जीत, जुगसलाई में नौशीन खान और झुमरी तिलैया में रमेश हर्षधर बने अध्यक्ष
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Feb 28, 2026, 11:11:00 AM

झारखंड के नगर परिषद चुनावों में कई सीटों पर दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले। रामगढ़ नगर परिषद में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार कुसुमलता कुमारी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 6,492 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें कुल 17,605 वोट मिले, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी और भाजपा समर्थित प्रत्याशी प्रिया कुमारी 11,113 मतों पर सिमट गईं।

जीत की आधिकारिक घोषणा होते ही रामगढ़ में उत्सव का माहौल बन गया। समर्थकों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर जश्न मनाया, जुलूस निकाले और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। अध्यक्ष पद की दौड़ में अन्य प्रत्याशियों को भी उल्लेखनीय मत मिले। रेणु देवी को 9,401, अनीता कुमारी को 8,232, सुरपाती देवी को 4,968, अर्पणा कुमारी को 4,082, रेणु कुमारी को 3,617, उमा कुमारी को 1,601 और पूजा कुमारी को 1,518 वोट प्राप्त हुए।

अपनी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए कुसुमलता कुमारी ने इसे जनता के विश्वास की जीत बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किए गए वादों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा और नगर परिषद क्षेत्र के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

इधर, जुगसलाई नगर परिषद में अध्यक्ष पद के लिए हुए मुकाबले में नौशीन खान ने 520 मतों के अंतर से रिंकू सिंह को पराजित किया। जीत के बाद नौशीन खान ने सभी वर्गों के समर्थन के लिए आभार जताया और कहा कि यह उनकी टीम की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे सभी समुदायों के लिए समान रूप से कार्य करेंगी।

कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया नगर परिषद में भी परिणाम रोचक रहे। यहां रमेश हर्षधर ने अपने प्रतिद्वंद्वी राजेंद्र जसवाल को 729 मतों से हराकर अध्यक्ष पद हासिल किया। उल्लेखनीय है कि रमेश हर्षधर इससे पहले तीन बार अध्यक्ष पद का चुनाव हार चुके थे, लेकिन इस बार उन्हें सफलता मिली।

रमेश हर्षधर ने अपनी जीत को क्षेत्र की जनता की विजय बताया। उन्होंने कहा कि नगर परिषद के कई मोहल्लों में अब भी बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इन बुनियादी जरूरतों को पूरा करना उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहेगा।