खरसावां : नये साल के पहले दिन शहीदों को श्रद्धांजलि, 1948 गो*लीकांड की स्मृति में शहीद बेदी पर जुटे लोग

खरसावां : नये साल के पहले दिन शहीदों को श्रद्धांजलि, 1948 गो*लीकांड की स्मृति में शहीद बेदी पर जुटे लोग

खरसावां : नये साल के पहले दिन शहीदों को श्रद्धांजलि, 1948 गो*लीकांड की स्मृति में शहीद बेदी पर जुटे लोग
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 01, 2026, 3:32:00 PM

नववर्ष के पहले दिन सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां शहीद बेदी पर आस्था, स्मृति और सम्मान का संगम देखने को मिला। 1 जनवरी को झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा से हजारों लोग यहां पहुंचे और वर्ष 1948 के ऐतिहासिक गोलीकांड में जान गंवाने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह परंपरा हर वर्ष शहीद दिवस के रूप में निभाई जाती है।

शहीद दिवस के अवसर पर खरसावां शहीद पार्क स्थित समाधि स्थल को विशेष रूप से सजाया गया था। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, सांसद जोबा मांझी सहित कई विधायक, जनप्रतिनिधि और राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रमुख नेता उपस्थित रहे। सभी ने शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए उनके संघर्ष को याद किया।

कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की गई थीं। विधि-व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे क्षेत्र में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई। वहीं खरसावां चांदनी चौक से सरायकेला, आमदा, कुचाई और हुड़गंदा जाने वाले मार्गों पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से करीब 100 स्वागत द्वार बनाए गए, जिससे पूरा इलाका शहीदों की स्मृति में सजा नजर आया।

इतिहास के पन्नों में दर्ज 1 जनवरी 1948 का दिन खरसावां के लिए कभी न भूलने वाला है। उस दिन खरसावां रियासत को ओडिशा से अलग करने की मांग को लेकर आयोजित जनसभा के दौरान हालात बिगड़ गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर तत्कालीन ओडिशा मिलिट्री ने गोलियां चला दीं, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए। इस घटना में शहीद हुए लोगों की सटीक संख्या आज भी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

आजादी के बाद हुए सबसे बड़े नरसंहारों में गिने जाने वाले इस कांड की स्मृति में हर वर्ष 1 जनवरी को लोग खरसावां शहीद स्थल पर एकत्र होकर अपने पूर्वजों के बलिदान को याद करते हैं और यह संकल्प दोहराते हैं कि शहीदों की कुर्बानी कभी भुलाई नहीं जाएगी।