कम वर्षा की आशंका कों लेकर सरकार अलर्ट, किसानों के लिए बहुस्तरीय रणनीति तैयार

कम वर्षा की आशंका कों लेकर सरकार अलर्ट, किसानों के लिए बहुस्तरीय रणनीति तैयार

कम वर्षा की आशंका कों लेकर सरकार अलर्ट, किसानों के लिए बहुस्तरीय रणनीति तैयार
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 30, 2026, 5:13:00 PM

राज्य में आगामी वित्तीय वर्ष 2026–27 के दौरान सामान्य से कम वर्षा की संभावित स्थिति को देखते हुए सरकार ने तैयारियों को तेज कर दिया है। मौसम पूर्वानुमानों में 30 से 35 प्रतिशत तक बारिश घटने की संभावना जताई गई है, जिसे गंभीरता से लेते हुए कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसान हित सर्वोपरि रखा जाए।

बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि यह स्थिति केवल राज्य तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि देश के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। विशेषकर मध्य भारत में सूखे जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अग्रिम तैयारी शुरू कर दी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

सरकार ने किसानों तक समय पर सहायता पहुंचाने के लिए आकस्मिक निधि के उपयोग को मजबूत बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत जरूरत पड़ने पर वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि विपरीत परिस्थितियों में भी किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

रणनीति के तहत कृषि प्रणाली में बदलाव पर जोर दिया जा रहा है। किसानों को पारंपरिक धान आधारित खेती पर निर्भरता कम करने की सलाह दी गई है, खासकर ऊंचे भूभागों में कम पानी वाली फसलों जैसे रागी, उड़द, मूंग और सोयाबीन को बढ़ावा देने की योजना है। इसके साथ ही क्षेत्र विशेष के अनुरूप धान की उपयुक्त किस्मों के चयन पर भी बल दिया जा रहा है, ताकि कम बारिश की स्थिति में भी उत्पादन संतुलित रहे।

कृषि विविधीकरण को आय बढ़ाने का अहम माध्यम माना गया है। बागवानी, चारा उत्पादन और मिश्रित खेती को प्रोत्साहित कर किसानों को वैकल्पिक आय स्रोत उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। सूखे के जोखिम को कम करने के लिए मेड़ों पर सब्जी उत्पादन, अरहर की खेती और इंटरक्रॉपिंग जैसे उपायों को बढ़ावा दिया जाएगा।

पशुपालन को भी आय के स्थिर स्रोत के रूप में मजबूत करने की योजना है। मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे अपने पशुधन की सुरक्षा और देखभाल पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि कठिन समय में यही सहारा बन सकता है।

जल प्रबंधन को इस पूरी योजना का प्रमुख आधार बनाया गया है। चेक डैम, जलाशयों में जल संचयन, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार इन उपायों के लिए सब्सिडी और तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रही है, ताकि जल संकट के प्रभाव को कम किया जा सके।

इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से किसानों तक उन्नत बीज, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक पहुंचाने की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि खरीफ सीजन में फसलों को नुकसान होता है, तो रबी सीजन में दलहन और मिलेट्स को बढ़ावा देकर किसानों की आय संतुलित रखने का प्रयास किया जाएगा।

बैठक में विभागीय सचिव अबूबकर सिद्दीकी, विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.सी. दुबे, कृषि निदेशक भोर सिंह यादव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।