“संघे शक्ति कलियुगे” के संदेश के साथ कल्पना सोरेन ने महिलाओं की सामूहिक ताकत को सराहा

“संघे शक्ति कलियुगे” के संदेश के साथ कल्पना सोरेन ने महिलाओं की सामूहिक ताकत को सराहा

“संघे शक्ति कलियुगे” के संदेश के साथ कल्पना सोरेन ने महिलाओं की सामूहिक ताकत को सराहा
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 20, 2026, 2:07:00 PM

गांडेय विधायक और झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की सभापति कल्पना मुर्मू सोरेन ने महिला सशक्तिकरण और सामूहिक आर्थिक भागीदारी को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया है। सोशल मीडिया मंच X पर किए गए अपने पोस्ट में उन्होंने सहकारिता आधारित उद्योगों की ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में सामूहिक प्रयास ही समाज और अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

महाराष्ट्र दौरे के दौरान मुंबई स्थित डब्बावाला इंटरनेशनल एक्सपीरियंस सेंटर के भ्रमण का उल्लेख करते हुए उन्होंने वहां की कार्यसंस्कृति की सराहना की। कल्पना सोरेन ने कहा कि करीब डेढ़ शताब्दी से अधिक समय से मुंबई के डब्बावाले अनुशासन, समय पालन और सेवा भावना के कारण वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। उनके अनुसार, इतने लंबे समय तक निरंतर दक्षता के साथ कार्य करना अपने आप में प्रेरणादायक उदाहरण है।

Kalpana Soren Tweet

अपने पोस्ट में उन्होंने प्रसिद्ध “श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़” का भी जिक्र किया और इसे महिला नेतृत्व वाले सफल सहकारी मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यावसायिक संस्था नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने वाला सामाजिक अभियान है, जिसने बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार, सम्मान और आत्मविश्वास प्रदान किया है।

कल्पना सोरेन ने विशेष रूप से विकेंद्रीकृत उत्पादन व्यवस्था की उपयोगिता पर जोर दिया। उनके मुताबिक इस व्यवस्था के तहत महिलाएं अपने घर या स्थानीय स्तर पर रहकर काम कर सकती हैं, जिससे वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आय अर्जित करने में भी सक्षम बनती हैं। उन्होंने इसे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने और स्थानीय कौशल को संरक्षित करने का प्रभावी माध्यम बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड समेत ग्रामीण भारत में गृह उद्योग और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है। उनके अनुसार, लिज्जत पापड़ जैसे मॉडल को हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य छोटे उद्योगों में अपनाकर बड़ी संख्या में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

विधायक ने सरकार, सामाजिक संगठनों और निजी संस्थाओं से मिलकर काम करने की अपील करते हुए कहा कि यदि समन्वित प्रयास किए जाएं तो ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराई जा सकती है। उन्होंने सामूहिक भागीदारी को सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बताया।

गौरतलब है कि झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो द्वारा संसदीय समितियों के पुनर्गठन के दौरान कल्पना सोरेन को महिला एवं बाल विकास समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके इस संदेश को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है और महिला आधारित सहकारी मॉडल को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।