धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की हत्या से जुड़े चर्चित मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में दोषी ठहराए गए लखन वर्मा और राहुल वर्मा की जमानत याचिकाओं पर दिनभर चली विस्तृत बहस के पश्चात अदालत ने आदेश बाद में सुनाने का संकेत दिया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सब्यसाची ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया, जबकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का प्रतिनिधित्व करते हुए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल अनिल कुमार ने जमानत का कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखने का फैसला किया।
यह मामला 28 जुलाई 2021 की उस घटना से जुड़ा है, जब सुबह की सैर पर निकले जज उत्तम आनंद को एक ऑटो ने टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में यह हादसा संदिग्ध लगा और बाद में सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने घटना को सुनियोजित बताया। इसके बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई, जिसने राहुल वर्मा और लखन वर्मा को गिरफ्तार किया।
मामले की सुनवाई सीबीआई की विशेष अदालत में हुई, जहां लगभग एक वर्ष की सुनवाई के बाद 6 अगस्त 2022 को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया। अदालत ने उन्हें हत्या और साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोषसिद्ध मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जो उनकी अंतिम सांस तक लागू रहने वाली है।