JTET 2026 में स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा, झारखंड के सभी जिलों के लिए नई सूची जारी

JTET 2026 में स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा, झारखंड के सभी जिलों के लिए नई सूची जारी

JTET 2026 में स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा, झारखंड के सभी जिलों के लिए नई सूची जारी
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 28, 2026, 2:37:00 PM

झारखंड सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 (JTET) के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के विभिन्न जिलों में प्रचलित जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की विस्तृत सूची प्रकाशित कर दी है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा तैयार की गई नई नियमावली को 26 मार्च को आधिकारिक गजट में अधिसूचित किया गया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय भाषाई विरासत को संरक्षित करना और प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा की भूमिका को मजबूत बनाना है।

नई व्यवस्था के तहत राज्य के सभी 24 जिलों में वहां बोली जाने वाली प्रमुख जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को मान्यता दी गई है। राजधानी रांची में कुडुख (उरांव), मुंडारी, खड़िया और भूमिज जैसी आदिवासी भाषाओं के साथ नागपुरी, पंचपरगनिया, कुरमाली और बांग्ला को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल किया गया है। वहीं, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, पलामू और गढ़वा जैसे इलाकों में कुडुख और नागपुरी का वर्चस्व दिखाई देता है।

सिंहभूम क्षेत्र के जिलों (पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां) में संथाली, हो, मुंडारी और भूमिज जैसी जनजातीय भाषाओं को प्रमुखता दी गई है, जबकि क्षेत्रीय भाषाओं में कुरमाली, उड़िया और बांग्ला को स्थान मिला है। संथाल परगना के दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा जिलों में संथाली प्रमुख भाषा के रूप में उभरती है, जबकि खोरठा और बांग्ला को क्षेत्रीय स्तर पर मान्यता दी गई है।

उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र के हजारीबाग, कोडरमा, चतरा और बोकारो में संथाली और कुडुख के साथ नागपुरी, खोरठा और कुरमाली को शामिल किया गया है। धनबाद, गिरिडीह और देवघर में भी इसी प्रकार का भाषाई संयोजन देखा गया है। रामगढ़ में संथाली और कुडुख के साथ नागपुरी, कुरमाली और खोरठा को सूची में जगह दी गई है, जबकि खूंटी में कुडुख, खड़िया और मुंडारी के साथ नागपुरी, पंचपरगनिया और कुरमाली को मान्यता प्रदान की गई है।

विभाग का मानना है कि इस नीति से स्थानीय युवाओं को शिक्षक नियुक्ति में बेहतर अवसर मिलेंगे, साथ ही छोटे बच्चों को उनकी अपनी भाषा में शिक्षा प्राप्त करने में सहूलियत होगी। शिक्षा विशेषज्ञ भी इसे सकारात्मक पहल मानते हैं, क्योंकि मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा से बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति और सीखने की गति में सुधार होता है। यह निर्णय नई शिक्षा नीति के अनुरूप है, जिसमें प्राथमिक स्तर पर स्थानीय भाषा के उपयोग पर विशेष बल दिया गया है।