झारखंड की ग्रामीण जल योजनाओं पर संकट! धीमी प्रगति से विभाग चिंतित, समीक्षा बैठक में नहीं पहुंची एजेंसी
झारखंड की ग्रामीण जल योजनाओं पर संकट! धीमी प्रगति से विभाग चिंतित, समीक्षा बैठक में नहीं पहुंची एजेंसी
झारखंड में जल जीवन मिशन (JJM), जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) और राज्य योजना के तहत चल रही ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं की रफ्तार को लेकर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की चिंता बढ़ गई है। विभागीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार कई महत्वपूर्ण योजनाएं निर्धारित समयसीमा से काफी पीछे चल रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर असर पड़ रहा है।
परियोजनाओं की स्थिति का आकलन करने के लिए विभागीय सचिव की अध्यक्षता में एक विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की गई। अभियान निदेशक शशि रंजन की ओर से जारी निर्देश में विभिन्न प्रमंडलों के अभियंताओं को अद्यतन प्रगति रिपोर्ट के साथ बैठक में शामिल होने को कहा गया था। समीक्षा का प्रमुख केंद्र उन योजनाओं की स्थिति थी, जिनका निष्पादन श्रीराम ईपीसी द्वारा किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, जिन परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर चर्चा के लिए बैठक आयोजित की गई थी, उसी एजेंसी का कोई प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं हुआ। विभागीय हलकों में इसे गंभीरता से देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन से संचालित परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान संबंधित एजेंसी की गैरमौजूदगी जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार कंपनी को विभिन्न जिलों में लगभग 2.42 लाख घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि मार्च 2026 तक केवल 33,556 कनेक्शन ही दिए जा सके हैं। यह कुल लक्ष्य का करीब 14 प्रतिशत है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार एजेंसी को आवंटित किसी भी प्रमुख परियोजना का कार्य अभी तक पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हो पाया है।
कई जिलों की परियोजनाएं वर्षों से अधूरी
पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, चतरा, धनबाद और देवघर सहित कई जिलों की ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं अभी भी अधूरी हैं। इनमें चाईबासा क्षेत्र की योजनाएं, तांतनगर ब्लॉक कवरेज परियोजना, चौपारण और बरही क्षेत्र की जल योजनाएं, टंडवा पेयजल परियोजना, गोविंदपुर-निरसा मल्टी विलेज योजना तथा मारगोमुंडा मेगा ग्रामीण जलापूर्ति योजना जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। कई स्थानों पर भारी वित्तीय व्यय के बावजूद अपेक्षित संख्या में नल कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं।
विभागीय पत्राचार में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्य एजेंसी द्वारा अपेक्षित गति और गंभीरता नहीं दिखाए जाने से योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। इसका असर न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सेवाओं पर पड़ रहा है, बल्कि विभाग की कार्यक्षमता और सार्वजनिक छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी कारण परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति का विस्तृत ब्यौरा अधिकारियों से मांगा गया था।
श्रीराम ईपीसी का नाम पहले भी विभिन्न परियोजनाओं को लेकर विवादों में आ चुका है। तांतनगर जलापूर्ति योजना में कथित अनियमितताओं और कार्य निष्पादन से जुड़ी शिकायतों के बाद कंपनी को एक समय डिबार भी किया गया था। बाद में प्रतिबंध हटने के पश्चात उसे फिर से सैकड़ों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का दायित्व सौंपा गया। वर्तमान में उन्हीं परियोजनाओं की धीमी प्रगति विभाग के लिए चुनौती बनती दिखाई दे रही है।
धनबाद की योजनाओं पर भी जांच
धनबाद क्षेत्र में संचालित कुछ परियोजनाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं। जानकारी के अनुसार, गुणवत्ता, भुगतान और वास्तविक कार्य प्रगति से जुड़े मुद्दों पर झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी (JUIDCO) द्वारा भी कार्रवाई की जा चुकी है। कई मामलों में वित्तीय भुगतान और जमीन पर दिखाई देने वाली प्रगति के बीच अंतर को लेकर शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनकी जांच विभिन्न स्तरों पर चल रही है।
समीक्षा बैठक के बाद जब इस विषय पर अभियान निदेशक शशि रंजन से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि मामला विभागीय सचिव के स्तर पर विचाराधीन है, इसलिए वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। विभागीय सूत्रों का कहना है कि फिलहाल अधिकारियों को इस मामले में सार्वजनिक रूप से बयान देने से बचने के निर्देश दिए गए हैं। सचिव से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन व्यस्तता के कारण उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
ग्रामीण क्षेत्रों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजनाओं की सुस्त प्रगति अब विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। आने वाले समय में विभाग एजेंसी के खिलाफ क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।