झारखंड के गांवों को मिली रिकॉर्ड फंडिंग, 15वें वित्त आयोग से 2,254 करोड़ रुपये का आवंटन

झारखंड के गांवों को मिली रिकॉर्ड फंडिंग, 15वें वित्त आयोग से 2,254 करोड़ रुपये का आवंटन

झारखंड के गांवों को मिली रिकॉर्ड फंडिंग, 15वें वित्त आयोग से 2,254 करोड़ रुपये का आवंटन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 01, 2026, 10:51:00 AM

झारखंड सरकार ने ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पंचायतों को अभूतपूर्व वित्तीय सहायता प्रदान की है। राज्य की कुल 4345 ग्राम पंचायतों के लिए केंद्र से प्राप्त धनराशि के आधार पर व्यापक विकास योजनाओं को गति देने की तैयारी है।

15वें वित्त आयोग के तहत राज्य को इस वर्ष के अंत तक लगभग 2254 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जो राज्य गठन के बाद अब तक का सबसे बड़ा आवंटन माना जा रहा है। इस राशि का औसत निकालें तो प्रत्येक पंचायत के हिस्से में करीब 51.80 लाख रुपये आते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

इस बार की एक अहम विशेषता यह भी है कि राज्य वित्त आयोग की ओर से भी पंचायतों को पहली बार अनुदान उपलब्ध कराया गया है। इसे ग्रामीण स्वशासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि इस राशि को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार के साथ विस्तृत प्रक्रिया अपनाई गई। कई दौर की बैठकों और लगातार संवाद के बाद यह फंड स्वीकृत हो पाया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में 624.50 करोड़, 2022-23 में 1271 करोड़, 2023-24 में 1300 करोड़, 2024-25 में 653.50 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 2254 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

राज्य के विभिन्न प्रमंडलों के बीच इस राशि का वितरण भी तय किया गया है। उत्तरी छोटानागपुर को सर्वाधिक 767.15 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। इसके बाद संथाल परगना को 520.59 करोड़, दक्षिणी छोटानागपुर को 367.78 करोड़, कोल्हान क्षेत्र को 300.44 करोड़ और पलामू प्रमंडल को 294.74 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

इन फंड्स का उपयोग अलग-अलग योजनाओं के तहत किया जाएगा। जहां ‘टाइड फंड’ के माध्यम से पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा, वहीं ‘अनटाइड फंड’ का उपयोग पंचायतों की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य विकास कार्यों में किया जाएगा।

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि ग्रामीण विकास देश की प्रगति का आधार है। महात्मा गांधी के विचारों का हवाला देते हुए उन्होंने जोर दिया कि गांवों को मजबूत किए बिना समग्र विकास की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि पंचायत प्रतिनिधि पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ इन संसाधनों का उपयोग करें, तो इससे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा।