ग्रीन स्टील की दिशा में झारखंड की बड़ी छलांग, दावोस में टाटा स्टील के साथ ₹11,000 करोड़ से अधिक के निवेश पर ऐतिहासिक सहमति

ग्रीन स्टील की दिशा में झारखंड की बड़ी छलांग, दावोस में टाटा स्टील के साथ ₹11,000 करोड़ से अधिक के निवेश पर ऐतिहासिक सहमति

ग्रीन स्टील की दिशा में झारखंड की बड़ी छलांग, दावोस में टाटा स्टील के साथ ₹11,000 करोड़ से अधिक के निवेश पर ऐतिहासिक सहमति
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 20, 2026, 10:26:00 AM

वैश्विक औद्योगिक बदलाव के दौर में झारखंड ने खुद को हरित विनिर्माण के अग्रदूत के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया है। विश्व आर्थिक मंच, दावोस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में झारखंड सरकार और टाटा स्टील लिमिटेड के बीच लेटर ऑफ इंटेंट और समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। इस करार के तहत राज्य में न्यू-एज ग्रीन स्टील तकनीकों को अपनाने के लिए ₹11,000 करोड़ से अधिक के निवेश का रोडमैप तैयार किया गया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

हरित आयरनमेकिंग की नई नींव

इस निवेश का केंद्र बिंदु अगली पीढ़ी की आयरनमेकिंग तकनीकें हैं। इनमें HISARNA और EASyMelt जैसी अत्याधुनिक प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है, जिन पर लगभग ₹7,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे। HISARNA तकनीक की खासियत यह है कि इसमें स्वदेशी कोयले और कम-ग्रेड लौह अयस्क का उपयोग संभव है, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और उत्पादन लागत में कमी आएगी। कार्बन कैप्चर और स्टोरेज के साथ यह तकनीक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को 80 प्रतिशत तक कम करने की क्षमता रखती है। नीदरलैंड में सफल परीक्षणों के बाद टाटा स्टील 2030 तक जमशेदपुर में करीब 10 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला वाणिज्यिक संयंत्र लगाने की योजना पर काम कर रही है।

वहीं EASyMelt तकनीक, जो इलेक्ट्रिकली असिस्टेड सिनगैस मेल्टर पर आधारित है, पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया को अधिक टिकाऊ बनाएगी। यह दुनिया की पहली ऐसी पहल मानी जा रही है, जिसमें सिनगैस के इस्तेमाल से कोक की खपत कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 50 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकेगी।

औद्योगिक ढांचे को नई मजबूती

ग्रीन आयरनमेकिंग के अलावा, इस समझौते में औद्योगिक विस्तार की अन्य योजनाएं भी शामिल हैं। ₹1,500 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक कॉम्बी मिल स्थापित की जाएगी, जबकि टिनप्लेट उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए ₹2,600 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना है, बल्कि उच्च-तकनीकी कौशल वाले रोजगारों का सृजन कर दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन पहलों से टाटा स्टील और झारखंड बड़े पैमाने पर हरित आयरनमेकिंग में ‘फर्स्ट मूवर’ की भूमिका निभा सकते हैं।

पर्यावरण के साथ संतुलित विकास का मॉडल

झारखंड सरकार इस निवेश को उस विकास दृष्टि के रूप में देख रही है, जिसमें औद्योगिक प्रगति पर्यावरण की कीमत पर नहीं होती। नई तकनीकों के समावेश से राज्य यह संदेश दे रहा है कि आर्थिक विकास और पारिस्थितिक संतुलन साथ-साथ चल सकते हैं। यह रणनीति न केवल कार्बन-न्यूट्रल भविष्य की ओर कदम है, बल्कि तकनीकी नेतृत्व और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।

औद्योगिक विरासत से हरित भविष्य तक

राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर हुआ यह समझौता झारखंड के बदलते औद्योगिक सफर को रेखांकित करता है। पारंपरिक खनिज-आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ते हुए राज्य अब हरित नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में अग्रसर है। इसी क्रम में, झारखंड सरकार और टाटा स्टील के बीच टाटा समूह से जुड़े खनन और विनिर्माण स्थलों पर औद्योगिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक अलग एमओयू पर भी सहमति बनी है।

बैठक के दौरान टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टी. वी. नरेंद्रन ने दावोस में मुख्यमंत्री की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड शिक्षा, विनिर्माण और खनन के क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है और ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राज्य की नियमित मौजूदगी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने राज्य की आईटीआई संस्थाओं को रोजगार और बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए टाटा स्टील द्वारा उन्हें गोद लेने का प्रस्ताव रखा, जिसे कंपनी ने स्वीकार कर लिया। इस अवसर पर टाटा समूह ने मुख्यमंत्री को दावोस स्थित टाटा डोम में रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया, जिसे मुख्यमंत्री ने सहर्ष स्वीकार किया।