झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने सरकार पर लगाया मानव संसाधन कुप्रबंधन का आरोप

झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने सरकार पर लगाया मानव संसाधन कुप्रबंधन का आरोप

झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने सरकार पर लगाया मानव संसाधन कुप्रबंधन का आरोप
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Feb 09, 2026, 2:42:00 PM

झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में पदोन्नत अधिकारियों की तैनाती व्यवस्था पर गंभीर नाराजगी जताई है। संघ का कहना है कि अधिकारियों को प्रोन्नति तो दी जा रही है, लेकिन उन्हें उनके मूल संवर्ग के स्वीकृत पदों पर नियुक्त करने के बजाय अपग्रेड किए गए (उत्क्रमित) पदों पर ही बनाए रखा जा रहा है, जो प्रशासनिक विफलता और संसाधनों के गलत इस्तेमाल को दर्शाता है।

इस संबंध में संघ ने कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

संघ अध्यक्ष रितेश कुमार और महासचिव राजेश कुमार सिंह द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है कि 3 नवंबर 2020 को जारी आदेश का मकसद पदोन्नति प्रक्रिया में देरी के कारण अधिकारियों को होने वाले वित्तीय नुकसान से बचाना था। इसके तहत जिस पद पर अधिकारी कार्यरत थे, उसी पद को ‘उत्क्रमित’ कर उन्हें प्रोन्नति का लाभ दे दिया गया था।

हालांकि संघ का दावा है कि यह व्यवस्था शुरुआत में अस्थायी और वैकल्पिक समाधान के रूप में लागू की गई थी, लेकिन अब इसे नियमित व्यवस्था बना दिया गया है।

पत्र में संघ ने यह भी कहा है कि इस व्यवस्था के कारण कई अधिकारी दस्तावेजों में वरिष्ठ श्रेणी में आ गए हैं और उच्च वेतनमान भी ले रहे हैं, लेकिन व्यवहारिक रूप से वे आज भी कनिष्ठ स्तर के कार्य ही कर रहे हैं। संघ के मुताबिक इससे अधिकारियों को उनके पद के अनुरूप वास्तविक जिम्मेदारी नहीं मिल पा रही, जिससे कार्यक्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

संघ ने चेतावनी दी है कि इस व्यवस्था से सरकार को दोहरी क्षति हो रही है। एक ओर कनिष्ठ पदों के कार्य के लिए वरिष्ठ वेतनमान का भुगतान किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सचिवालय के कई स्वीकृत वरिष्ठ पद खाली पड़े हैं, जिससे विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है।

19 संयुक्त सचिवों में 9 को एक ही पद पर दो-दो स्तर की प्रोन्नति

संघ ने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्तमान में कार्यरत 19 संयुक्त सचिवों में से 9 ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें अवर सचिव से उप सचिव और फिर उप सचिव से संयुक्त सचिव तक की दोहरी पदोन्नति उसी एक पद पर दे दी गई।

पत्र में उदाहरण देते हुए कहा गया है कि पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग में संयुक्त सचिव का कोई स्वीकृत पद नहीं है, फिर भी वहां चार संयुक्त सचिव कार्यरत हैं। वहीं दूसरी तरफ गृह, स्कूली शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसे महत्वपूर्ण विभागों में संयुक्त सचिव के पद खाली पड़े हुए हैं।

संघ ने इस स्थिति को और भी चिंताजनक बताते हुए कहा कि जिस कार्मिक विभाग को राज्य के प्रशासनिक सुधार का नोडल विभाग माना जाता है, वहीं इस तरह का मानव संसाधन प्रबंधन प्रशासनिक संतुलन को बिगाड़ रहा है। संघ के अनुसार यह व्यवस्था न केवल प्रशासनिक स्थिरता पर असर डाल रही है, बल्कि कुशल शासन प्रणाली के उद्देश्य के भी विपरीत है।

झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने पत्र के माध्यम से मांग की है कि सभी वरिष्ठ अधिकारियों को उनके वर्तमान उत्क्रमित पदों से हटाकर तत्काल प्रभाव से वास्तविक स्वीकृत पदों के विरुद्ध पदस्थापित किया जाए, ताकि पदोन्नति के साथ वास्तविक जिम्मेदारियां भी सुनिश्चित हो सकें।