राज्य में पुलिस अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और बाहरी दबाव के मामलों को लेकर झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने सख्त रुख अपनाया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि विधिसम्मत कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों को रसूखदार व्यक्तियों या स्वार्थी तत्वों द्वारा प्रताड़ित किया गया, तो संगठन चुप नहीं बैठेगा।
\एसोसिएशन का आरोप है कि हाल के कुछ मामलों में प्रभावशाली लोग अपने पद और पहुंच का दुरुपयोग कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों पर नियमों के विरुद्ध काम करने का दबाव बनाया जाता है और इनकार करने पर उन्हें वर्दी उतरवाने तक की धमकी दी जाती है। संगठन ने इसे कानून व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत बताया है।
संगठन ने डोरंडा थाना और एसटी/एससी थाना से जुड़े घटनाक्रमों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ अधिवक्ताओं द्वारा पुलिस पर अनुचित मांगें मनवाने का दबाव डाला गया। एसोसिएशन ने सवाल उठाया कि क्या कानून सभी के लिए समान नहीं है? उनका तर्क है कि यदि कोई आम नागरिक किसी व्यक्ति को वाहन के बोनट पर बैठाकर चलाता, तो क्या उसके प्रति भी वही रवैया अपनाया जाता जो हालिया मामलों में देखने को मिला?
उच्च न्यायालय परिसर में धमकी का आरोप
एसोसिएशन ने अधिवक्ता मनोज टंडन से संबंधित प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित मामले में पुलिस पदाधिकारियों को घेरकर दबाव बनाने की कोशिश की गई। आरोप है कि उच्च न्यायालय परिसर में भी थाना प्रभारी को जेल भेजने की धमकी दी गई। संगठन ने चिंता जताई कि इस तरह की घटनाएं न्यायालय की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं और कुछ अधिवक्ताओं का आचरण मर्यादित नहीं दिख रहा।
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने साफ किया है कि वह अपने सदस्यों के सम्मान और सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। यदि एकतरफा या अनुचित कार्रवाई जारी रही, तो संगठन सामूहिक विरोध दर्ज कराएगा। आवश्यकता पड़ने पर पुलिसकर्मी चरणबद्ध आंदोलन या कार्य से विरत रहने जैसे कदम भी उठा सकते हैं।
फिलहाल, एसोसिएशन ने सरकार और संबंधित संस्थाओं से निष्पक्ष वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि पुलिस बल बिना किसी दबाव के कानून के अनुसार कार्य कर सके।