झारखंड पुलिस एसोसिएशन की आय और उसके उपयोग को लेकर पुलिस विभाग के भीतर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। पुलिसकर्मियों के वेतन से नियमित रूप से काटे जाने वाले सदस्यता योगदान को लेकर अब कई जवान सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि हर महीने वेतन खाते से निर्धारित राशि स्वतः कट जाती है, लेकिन इस धनराशि का उपयोग किन कार्यों में किया जा रहा है, इसकी स्पष्ट जानकारी सदस्यों को नहीं दी जाती।
सूत्रों के अनुसार राज्यभर के पुलिसकर्मियों से मासिक अंशदान के रूप में प्रति व्यक्ति लगभग 50 रुपये लिए जाते हैं। यह कटौती वेतन खाते में राशि आने से पहले ही कर ली जाती है। इसी प्रक्रिया के जरिए सालभर में करीब 42 लाख रुपये का कोष तैयार हो जाता है। बताया जा रहा है कि अब तक इस राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से संगठनात्मक बैठकों, चुनावी गतिविधियों और प्रशासनिक खर्चों में होता रहा है।
इसी बीच पुलिस बल के भीतर यह मांग तेज हो गई है कि इस फंड का बड़ा हिस्सा जवानों और उनके परिवारों की भलाई के लिए खर्च किया जाए। कई पुलिसकर्मियों का मानना है कि लंबे समय तक तनावपूर्ण ड्यूटी, अनियमित जीवनशैली और जोखिमपूर्ण कार्य परिस्थितियों के कारण जवानों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एसोसिएशन को पुलिसकर्मियों के लिए विशेष अस्पताल या स्वास्थ्य सुविधा केंद्र स्थापित करने की दिशा में पहल करनी चाहिए।
जवानों की ओर से यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि एसोसिएशन अपने कोष का उपयोग व्यापक सामाजिक और मानवीय कार्यों में करे। इनमें शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को आर्थिक सहायता, जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, आपदा राहत कार्य और कल्याणकारी योजनाओं को बढ़ावा देने जैसी पहल शामिल हैं।
पुलिसकर्मियों का एक वर्ग संगठन की वित्तीय कार्यप्रणाली में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता की भी मांग कर रहा है। उनका कहना है कि जब हर वर्ष लाखों रुपये का फंड एकत्र हो रहा है, तो उसके आय-व्यय का पूरा विवरण नियमित रूप से सार्वजनिक किया जाना चाहिए। सदस्यों का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था से न केवल संगठन के प्रति भरोसा बढ़ेगा, बल्कि पुलिस बल का मनोबल भी मजबूत होगा।