झारखंड में भूमि सर्वेक्षण की सुस्ती पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा स्पष्ट रोडमैप

झारखंड में भूमि सर्वेक्षण की सुस्ती पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा स्पष्ट रोडमैप

झारखंड में भूमि सर्वेक्षण की सुस्ती पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा स्पष्ट रोडमैप
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 08, 2026, 3:21:00 PM

 झारखंड के विभिन्न जिलों में लंबित भूमि सर्वेक्षण कार्य को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर गंभीर चिंता व्यक्त की। मुख्य न्यायाधीश एस.एम. सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा लगातार समय मांगने और सर्वेक्षण कार्य की प्रगति पर स्पष्ट जानकारी नहीं देने को लेकर नाराजगी जताई।

अदालत ने कहा कि पूर्व में सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी। हालांकि तय समय बीत जाने के बावजूद न तो काम पूरा हुआ और न ही सरकार की ओर से कोई संतोषजनक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर राज्यव्यापी भूमि सर्वेक्षण कब तक पूरा होगा और इसकी वास्तविक समयसीमा क्या है।

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 जुलाई की तारीख निर्धारित की गई है। अदालत ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई में सरकार को सर्वेक्षण कार्य की वर्तमान स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना स्पष्ट रूप से बतानी होगी।

याचिका में झारखंड के विभिन्न जिलों में भूमि सर्वेक्षण की धीमी गति का मुद्दा उठाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक केवल लातेहार और लोहरदगा जिलों में सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो सका है, जबकि राज्य के अधिकांश जिलों में यह प्रक्रिया अभी भी अधूरी है।

राज्य सरकार ने पहले सर्वेक्षण कार्य को आधुनिक तकनीक के माध्यम से तेज करने की बात कही थी। इसके लिए एक विशेष टीम ने केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में लागू भूमि सर्वेक्षण प्रणालियों का अध्ययन भी किया था। संबंधित राज्यों के मॉडल का मूल्यांकन करने के बाद रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी गई थी। इसके बावजूद जमीन पर अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही है, जिसे लेकर अब न्यायालय ने जवाबदेही तय करने की दिशा में सख्त रुख अपनाया है। भूमि अभिलेखों के अद्यतन और राजस्व प्रशासन की पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस सर्वेक्षण कार्य में हो रही देरी पर अब हाई कोर्ट की निगरानी और सख्ती बढ़ने की संभावना है।