झारखंड में एनीमिया से लड़ाई को मिला डिजिटल संबल, AMB T-4 ऐप के राज्यव्यापी विस्तार की तैयारी

झारखंड में एनीमिया से लड़ाई को मिला डिजिटल संबल, AMB T-4 ऐप के राज्यव्यापी विस्तार की तैयारी

झारखंड में एनीमिया से लड़ाई को मिला डिजिटल संबल, AMB T-4 ऐप के राज्यव्यापी विस्तार की तैयारी
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 15, 2026, 1:19:00 PM

झारखंड में महिलाओं और बच्चों के बीच एनीमिया की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली को मजबूत करने जा रहा है। इसी दिशा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कार्यालय, नामकुम में एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें AMB T-4 मोबाइल एप्लिकेशन के प्रभावी उपयोग और राज्यभर में इसके विस्तार की रणनीति पर चर्चा हुई।

बैठक में विशेषज्ञों ने ऐप की विभिन्न तकनीकी सुविधाओं का आकलन किया। इसमें इंटरनेट न होने की स्थिति में भी काम करने वाला ऑफलाइन फीचर, मरीजों की तत्काल निगरानी की सुविधा और गंभीर एनीमिया से पीड़ित लोगों की डिजिटल ट्रैकिंग जैसे बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने इस प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसे झारखंड एजेंसी फॉर प्रमोशन ऑफ आईटी (JAP-IT) के सर्वर पर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया।

इसके साथ ही, AMB T-4 ऐप को गांव स्तर पर चल रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसे VHSND और PMSMA से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विमर्श हुआ, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी एकीकृत तरीके से की जा सके।

बैठक में शिशु स्वास्थ्य कोषांग के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. विजय रजक, आईईसी के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. राहुल किशोर सिंह, JAP-IT और भारत सरकार के आईईजी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। डॉ. विजय रजक ने बताया कि अगले एक महीने के भीतर राज्य के सभी जिलों में इस ऐप को इंस्टॉल कर सक्रिय रूप से उपयोग में लाने का लक्ष्य तय किया गया है।

झारखंड के स्वास्थ्य विभाग की डिजिटल पहल को हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में राज्य के AMB T-4 ऐप और ‘एकीकृत शिशु देखभाल मॉडल’ को देश की बेहतरीन स्वास्थ्य पहलों में शामिल करते हुए सम्मानित किया गया था।

राज्य में सहिया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संयुक्त गृह भ्रमण मॉडल को भी विशेषज्ञों ने सराहा है। इस पहल के जरिए पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हुआ है, जिससे कुपोषित बच्चों की पहचान और उपचार की प्रक्रिया तेज हुई है।

राष्ट्रीय सम्मेलन में मौजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने झारखंड की इन पहलों को अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी मॉडल बताया।