झारखंड में इस वर्ष की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 9 मई को राज्यभर में किया जाएगा। इस अवसर पर सभी जिलों में विशेष बेंच बैठेंगी, जहां लाखों लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों के समाधान का प्रयास होगा। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन सुबह 10:30 बजे झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद करेंगे। उद्घाटन समारोह रांची सिविल कोर्ट परिसर स्थित 40 कोर्ट भवन के सभागार से आयोजित होगा।
झारखंड के सभी जिलों के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सहित अन्य न्यायिक अधिकारी इस कार्यक्रम से ऑनलाइन माध्यम से जुड़ेंगे। राज्यभर में लोक अदालत के संचालन के लिए करीब 300 बेंच गठित की गई हैं। इन बेंचों के समक्ष 22 लाख से अधिक मामलों को सुनवाई और निष्पादन के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इनमें लगभग 21.24 लाख प्री-लिटिगेशन मामले शामिल हैं, जबकि करीब 1.53 लाख मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।
कार्यक्रम के दौरान लाभुकों के बीच चेक और परिसंपत्तियों का भी वितरण किया जाएगा। इस मौके पर न्यायपालिका और विधिक सेवा संस्थाओं से जुड़े कई गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे।
राष्ट्रीय लोक अदालत में ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनका आपसी समझौते के आधार पर समाधान संभव हो। इनमें चेक बाउंस, बिजली चोरी, वन एवं उत्पाद अधिनियम से जुड़े मामले, माप-तौल विवाद, वैवाहिक मामले और विभिन्न प्रकार के दीवानी विवाद शामिल हैं। इसके अलावा, अदालत में दाखिल होने से पहले के विवादों को भी आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास किया जाता है।
झालसा के अधिकारियों के अनुसार, लोक अदालत न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ और त्वरित बनाने का एक प्रभावी माध्यम साबित हो रही है। इससे पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है और समय व खर्च दोनों की बचत होती है। लोक अदालतों में समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा होने से अदालतों पर लंबित मामलों का दबाव भी कम होता है।
जानकारी के अनुसार, वर्षभर में चार बार राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाती है। वर्ष 2026 की पहली लोक अदालत मार्च में संपन्न हो चुकी है। इसके बाद मई, जून और दिसंबर में भी राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाएंगी, जिनकी तिथियां पहले से निर्धारित कर दी गई हैं।