झारखंड की 108 एम्बुलेंस सेवा पर संकट, वेतन बकाया और अधिकारों के उल्लंघन को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल

झारखंड की 108 एम्बुलेंस सेवा पर संकट, वेतन बकाया और अधिकारों के उल्लंघन को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल

झारखंड की 108 एम्बुलेंस सेवा पर संकट, वेतन बकाया और अधिकारों के उल्लंघन को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 05, 2026, 11:10:00 AM

झारखंड में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा इन दिनों गंभीर विवादों में घिरी हुई है। इस सेवा का संचालन फिलहाल सम्मान फाउंडेशन के पास है, लेकिन कर्मचारियों ने संस्था पर श्रम कानूनों की अनदेखी और बुनियादी अधिकारों से वंचित रखने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें न तो समय पर वेतन मिल रहा है और न ही वैधानिक सुविधाएं दी जा रही हैं।

कर्मचारियों के अनुसार, उनकी मांगों को लेकर पहले भी कई बार विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। हर बार प्रबंधन की ओर से आश्वासन और समझौते किए गए, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ। इस स्थिति ने कर्मचारियों में असंतोष को और गहरा कर दिया है।

सरकारी निर्देशों पर सवाल
मामले में एक बड़ा मुद्दा यह भी उठ रहा है कि जब कंपनी पर सरकारी निर्देशों की अवहेलना के आरोप हैं, तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कर्मचारियों का दावा है कि इस ढिलाई के कारण कंपनी का रवैया और कठोर होता जा रहा है, जिससे उनकी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।

वर्तमान हालात में कर्मचारियों का मार्च और अप्रैल 2026 का वेतन लंबित है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे कर्मचारियों ने कई बार कंपनी प्रबंधन से संपर्क किया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अंततः 3 मई 2026 की शाम से उन्होंने काम बंद कर दिया और बाद में हड़ताल पर बैठ गए।

संघ की चेतावनी: सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो सकती हैं
झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नीरज तिवारी ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इस विवाद का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। समय पर एम्बुलेंस न मिलने से मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को बेहद कम वेतन (करीब 6 से 8 हजार रुपये) मिलता है, वह भी नियमित नहीं। ऐसी स्थिति में उनके लिए परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ERO के साथ EMT और वाहन चालक भी हड़ताल में शामिल हो सकते हैं।

आउटसोर्सिंग कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि एक साल से अधिक समय तक काम करने के बावजूद उन्हें नियुक्ति पत्र तक नहीं दिया गया है। इसके अलावा पीएफ, ईएसआईसी और जीवन बीमा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन बढ़ाने या अधिकारों की मांग करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है और मानसिक दबाव बनाया जाता है।

कर्मचारियों के मुताबिक, कंपनी के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत हुई, जिसमें जल्द समस्याएं दूर करने का भरोसा दिया गया। हालांकि, अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। उनका आरोप है कि सरकारी सेवा होने के बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा।

कर्मचारियों ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका खामियाजा न केवल कर्मचारियों बल्कि आम जनता को भी भुगतना पड़ेगा।