बायोमेडिकल कचरे पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, अस्पतालों और प्रशासन को दिये कड़े निर्देश

बायोमेडिकल कचरे पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, अस्पतालों और प्रशासन को दिये कड़े निर्देश

बायोमेडिकल कचरे पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, अस्पतालों और प्रशासन को दिये कड़े निर्देश
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Feb 26, 2026, 2:17:00 PM

झारखंड में बायोमेडिकल वेस्ट के प्रबंधन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने विस्तृत आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि तय मानकों के अनुसार चिकित्सा अपशिष्ट के निपटान को अब हर हाल में सुनिश्चित करना होगा। न्यायालय ने अपने निर्देशों के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया है, लेकिन संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी तय कर दी है।

यह मामला झारखंड ह्यूमन राइट्स कनफेडरेशन द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि राज्य में अस्पतालों और नर्सिंग होम से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान नहीं हो रहा, जिससे संक्रमण और पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) सहित झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने पूछा था कि जब नियम स्पष्ट रूप से लागू हैं, तो उनके पालन में ढिलाई क्यों बरती जा रही है। राज्य सरकार से भी जवाब मांगा गया था।

16 फरवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब जारी आदेश में कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य के सभी बड़े अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सभी जिलों के उपायुक्त और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित करें कि चिकित्सा कचरे का संग्रह, अलगाव, परिवहन और अंतिम निपटान निर्धारित नियमों के अनुरूप हो।

अदालत ने यह भी कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है। किसी भी स्तर पर लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब संबंधित विभागों की जवाबदेही बढ़ गई है। देखना यह होगा कि निर्देशों का असर जमीनी स्तर पर दिखाई देता है या नहीं।