बर्न वार्ड सुविधाओं पर झारखंड सरकार के जवाब से हाई कोर्ट संतुष्ट, जनहित याचिका निष्पादित

बर्न वार्ड सुविधाओं पर झारखंड सरकार के जवाब से हाई कोर्ट संतुष्ट, जनहित याचिका निष्पादित

बर्न वार्ड सुविधाओं पर झारखंड सरकार के जवाब से हाई कोर्ट संतुष्ट, जनहित याचिका निष्पादित
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 26, 2026, 12:34:00 PM

झारखंड हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश एस. एम. सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर शामिल थे, ने राज्य में बर्न वार्ड की उपलब्धता और व्यवस्थाओं को लेकर दायर जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत जवाब को पर्याप्त मानते हुए इस मामले को समाप्त कर दिया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को अवगत कराया कि वर्ष 2014 में प्राप्त अनुदान के आधार पर सभी जिलों के सदर अस्पतालों में बर्न यूनिट स्थापित करने और आवश्यक चिकित्सकीय व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं और व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं।

यह मामला जमशेदपुर स्थित एमजीएम अस्पताल की एक घटना से जुड़ा है, जहां फरवरी 2021 में गंभीर रूप से जली एक महिला को समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका था, जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। इस घटना पर अधिवक्ता अनूप अग्रवाल ने हाई कोर्ट को पत्र लिखकर ध्यान आकृष्ट कराया था। पत्र में उल्लेख किया गया था कि महिला को 14 फरवरी को भर्ती किया गया, लेकिन उपचार शुरू होने में देरी हुई और 18 फरवरी को उसकी मृत्यु हो गई।

अदालत ने इस पत्र को जनहित याचिका में परिवर्तित कर सुनवाई शुरू की थी और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) से मामले की जांच रिपोर्ट मांगी थी। झालसा ने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल स्तर पर लापरवाही की पुष्टि की थी।

सरकार की ओर से सफाई दी गई कि जिस दिन महिला को अस्पताल लाया गया, उस समय बर्न वार्ड की क्षमता से अधिक मरीज पहले से भर्ती थे। 20 बेड वाले वार्ड में 24 मरीज होने के कारण उसे तत्काल वहां स्थानांतरित नहीं किया जा सका। हालांकि, इस तर्क के बावजूद मामले ने राज्य में बर्न वार्ड की स्थिति और संसाधनों की कमी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

घटना में सामने आया था कि आदित्यपुर की रहने वाली महिला को उसके पति ने आग के हवाले कर दिया था, जिसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से झुलसी महिला को बर्न वार्ड में भर्ती न किए जाने और इलाज में देरी को उसकी मौत का कारण माना गया।

पूरे मामले पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका का निष्पादन कर दिया, हालांकि इस प्रकरण ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था, विशेषकर बर्न केयर सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया।