झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, NIA एक्ट में तय सीमा के बाद अपील स्वीकार नहीं

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, NIA एक्ट में तय सीमा के बाद अपील स्वीकार नहीं

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, NIA एक्ट में तय सीमा के बाद अपील स्वीकार नहीं
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 16, 2026, 12:59:00 PM

झारखंड हाईकोर्ट ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) अधिनियम से जुड़े मामलों में अपील दायर करने की समय-सीमा को लेकर एक अहम कानूनी स्पष्टता दी है। अदालत ने कहा है कि यदि अपील निर्धारित अधिकतम अवधि के बाद दायर की जाती है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और कोर्ट के पास उस देरी को माफ करने का अधिकार भी नहीं है।

जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि NIA एक्ट में अपील दाखिल करने के लिए जो समय-सीमा निर्धारित की गई है, वह बाध्यकारी है। यदि कोई अपील 90 दिनों की तय अवधि समाप्त होने के बाद दाखिल की जाती है, तो अदालत उसे स्वीकार करने या देरी को माफ करने के लिए अधिकृत नहीं है।

दरअसल, मामला एक आपराधिक अपील से जुड़ा था, जिसे इस आधार पर स्वीकार नहीं किया गया कि वह तय समय-सीमा के बाद दायर की गई थी। अपीलकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि NIA एक्ट की धारा 21(5) में दी गई समय-सीमा को अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 का हवाला देते हुए अदालत से अपील दाखिल करने में हुई देरी को माफ करने का अनुरोध किया था।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जब किसी विशेष कानून में अपील के लिए अधिकतम समय-सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाती है, तो अदालत के पास उसे बढ़ाने की शक्ति नहीं होती। कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सामान्य कानून, जैसे कि लिमिटेशन एक्ट, का सहारा लेकर समय-सीमा में विस्तार नहीं किया जा सकता।

अमर यासार की याचिका पर सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने यह भी कहा कि यदि कानून किसी प्रक्रिया के लिए 90 दिनों की अंतिम सीमा तय करता है, तो उसके बाद एक दिन की भी देरी को स्वीकार करना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इस प्रकार, अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि NIA एक्ट के मामलों में अपील की समय-सीमा का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है।