झारखंड हाई कोर्ट ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी (तृतीय प्रस्तुति कमेटी) से कथित रूप से जुड़े प्रमोद गंझू को जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आरोपी की जमानत का कड़ा विरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि गंझू पर उग्रवादी गतिविधियों में संलिप्तता के गंभीर आरोप हैं, जिनमें जबरन वसूली और भय का माहौल बनाने जैसी घटनाएं शामिल हैं। NIA ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी की भूमिका केवल सीमित नहीं रही, बल्कि वह संगठन की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है।
जांच एजेंसी ने तेतरिया गोलीकांड का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि इस घटना में प्रमोद गंझू की अहम भागीदारी रही थी। इस मामले में बालूमाथ थाने में वर्ष 2020 में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसकी जांच अब केंद्रीय एजेंसी कर रही है।
इसके अलावा, NIA ने आरोपी के आपराधिक नेटवर्क पर भी प्रकाश डाला। एजेंसी के अनुसार, गंझू का संबंध कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू से भी रहा है। शुरुआती दौर में वह अमन साहू गिरोह के साथ मिलकर काम करता था और व्यापारियों को निशाना बनाकर कई वारदातों को अंजाम देने में शामिल रहा।
मामले की जांच अभी जारी है और NIA इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है। अदालत के इस फैसले को जांच एजेंसी के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।