झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के एक विधि शिक्षण संस्थान में गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए आगामी सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत में सुनवाई के दौरान पारित किया गया।
मामले की शुरुआत अंबेश कुमार चौबे सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका से हुई, जिसमें संस्थान की बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए गए थे। याचिका में कहा गया कि संस्थान में सैकड़ों छात्र अध्ययनरत हैं, लेकिन वहां पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही, न तो संस्थान के पास समुचित पुस्तकालय है और न ही खेलकूद जैसी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अनूप कुमार अग्रवाल ने अदालत को बताया कि संस्थान बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी स्थिति में वहां पढ़ रहे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने फिलहाल नए सत्र के लिए नामांकन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। यह फैसला संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।