झारखंड में 96 करोड़ से अधिक के डीसी बिल लंबित, वित्तीय अनुशासन पर उठे सवाल

झारखंड में 96 करोड़ से अधिक के डीसी बिल लंबित, वित्तीय अनुशासन पर उठे सवाल

झारखंड में 96 करोड़ से अधिक के डीसी बिल लंबित, वित्तीय अनुशासन पर उठे सवाल
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 30, 2026, 2:47:00 PM

राज्य की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाले डीसी (डिटेल्ड कंटिंजेंसी) बिलों का बड़ा हिस्सा अब भी लंबित है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से लेकर 2025-26 तक विभिन्न विभागों के कुल 96 करोड़ 71 लाख 26 हजार 917 रुपये के डीसी बिल कोषागारों में जमा नहीं किए गए हैं, जिससे सरकारी खर्चों के लेखे-जोखे पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबसे अधिक बकाया स्वास्थ्य विभाग के खाते में है, जहां 78 करोड़ 66 लाख 89 हजार 929 रुपये के बिल लंबित पड़े हैं। इसके बाद गृह विभाग का स्थान है, जहां 25 करोड़ 58 लाख 35 हजार 345 रुपये का हिसाब अभी तक प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसके अलावा पर्यटन विभाग के 10 करोड़ 93 लाख 40 हजार 828 रुपये और डोरंडा कोषागार में उच्च न्यायालय से जुड़े 9 करोड़ 14 लाख 41 हजार 117 रुपये के डीसी बिल भी लंबित हैं।

अन्य विभागों की बात करें तो आईटी विभाग पर 56 लाख 15 हजार 400 रुपये, श्रम विभाग पर 80 लाख रुपये, निर्वाचन विभाग पर 77 लाख 37 हजार 500 रुपये, कैबिनेट मद में 18 लाख रुपये, जबकि कॉमर्शियल टैक्स और ग्रामीण विकास विभागों के क्रमशः 8 लाख 39 हजार 11 रुपये और 8 लाख 6 हजार 423 रुपये के बिल अभी तक जमा नहीं किए गए हैं।

दरअसल, जब किसी विभाग को आकस्मिक या आपात खर्च के लिए अग्रिम राशि दी जाती है, तो उसे एसी (एब्सट्रैक्ट कंटिंजेंसी) बिल के तहत निकाला जाता है। बाद में इस राशि के उपयोग का पूरा विवरण, संबंधित रसीदें और वाउचर कोषागार में प्रस्तुत किए जाते हैं, जिसे डीसी बिल कहा जाता है। यह प्रक्रिया सरकारी वित्तीय नियंत्रण की रीढ़ मानी जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि समयसीमा के भीतर डीसी बिल जमा नहीं करने से संबंधित राशि को बकाया माना जाता है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। लंबित बिलों की बढ़ती संख्या प्रशासनिक सतर्कता और वित्तीय अनुशासन दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है।