झारखंड में हाथी आतंक पर सरकार सख्त, मुख्यमंत्री ने वन विभाग को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

झारखंड में हाथी आतंक पर सरकार सख्त, मुख्यमंत्री ने वन विभाग को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

झारखंड में हाथी आतंक पर सरकार सख्त, मुख्यमंत्री ने वन विभाग को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Feb 14, 2026, 7:23:00 PM

रांची स्थित कांके रोड में मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष और लगातार हो रही जनहानि को रोकने की रणनीति रहा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि हाथियों के हमलों से होने वाली मौतों पर हर हाल में रोक लगाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी क्षेत्र में नागरिकों की जान-माल को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में तुरंत सुरक्षा और बचाव के प्रभावी उपाय लागू किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने हाथियों के बढ़ते हमलों को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि बीते कुछ दिनों में बड़ी संख्या में कैजुअल्टी की खबरें सामने आई हैं। अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि पिछले कुछ महीनों में रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला, दुमका समेत कई जिलों में हाथियों के हमलों में लगभग 27 लोगों की जान जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने इसे बेहद गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि अब इस पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ग्रामीणों को प्रशिक्षण देकर बनेगी ‘एलीफेंट रेस्क्यू टीम’

बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिन इलाकों में हाथी लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं, वहां स्थानीय ग्रामीणों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण देकर एलीफेंट रेस्क्यू टीम तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि गांवों में हाथियों की घुसपैठ रोकने के लिए हर जरूरी उपाय किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रभावित गांवों को मशाल जलाने के लिए डीजल और किरासन तेल, पुराने टायर, टॉर्च, सोलर सायरन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि ग्रामीणों को हाथियों को दूर भगाने में मदद मिल सके। साथ ही वन विभाग को ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों से सवाल किया कि झारखंड में बड़ी संख्या में हाथी जंगल से भटककर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं, लेकिन वन विभाग अब तक कोई मजबूत और स्थायी मैकेनिज्म तैयार क्यों नहीं कर पाया।

इस पर अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि हाथी रेस्क्यू के लिए जल्द एक क्विक रिस्पांस मैकेनिज्म तैयार किया जा रहा है। विभाग की योजना के तहत 6 कुनकी हाथी भी मंगाए जा रहे हैं, जिनकी मदद से ट्रैकिंग और रेस्क्यू ऑपरेशन को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा विशेषज्ञों की सहायता लेकर रेस्क्यू सिस्टम को और प्रभावी बनाया जाएगा।

12 दिनों के भीतर मुआवजा देने का आदेश

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि हाथी या अन्य जंगली जानवरों के हमले से अगर किसी की मौत होती है, तो पीड़ित परिवार को 12 दिनों के भीतर पूरी मुआवजा राशि मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुआवजा वितरण में किसी भी तरह की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

साथ ही मुख्यमंत्री ने विभाग को यह भी निर्देश दिया कि एनिमल अटैक से जुड़े मौजूदा मुआवजा नियमों की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किए जाएं, ताकि पीड़ितों को जल्द और न्यायसंगत राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में केवल जान का नुकसान नहीं होता, बल्कि फसल, पशुधन और आजीविका भी प्रभावित होती है, इसलिए इन मामलों को संवेदनशीलता के साथ देखना जरूरी है।

पांच साल का डेटा और एलिफेंट कॉरिडोर मैपिंग के निर्देश

मुख्यमंत्री ने वन विभाग को आदेश दिया कि पिछले पांच वर्षों में हुई कैजुअल्टी और दिए गए मुआवजों से संबंधित विस्तृत डेटा राज्य सरकार को उपलब्ध कराया जाए। साथ ही झारखंड के सभी एलिफेंट कॉरिडोर की मैपिंग कराने के निर्देश भी दिए गए, ताकि संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर योजना बनाई जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं पर सरकार गंभीर और संवेदनशील है तथा प्रभावित लोगों को समय पर राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में मुख्यमंत्री ने हाथियों के हालिया हमलों की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी। वन विभाग ने बताया कि हजारीबाग क्षेत्र में पांच हाथियों का एक झुंड काफी आक्रामक है, जिसके चलते स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इन हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों को रोकने के लिए विभाग ने 70 लोगों की टीम तैनात की है और विभाग अलर्ट मोड में काम कर रहा है।

बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

इस बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी पी, पीसीसीएफ (हॉफ) संजीव कुमार, पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) रवि रंजन, सीसीएफ (वाइल्डलाइफ) एस.आर. नाटेश, आरसीएफ हजारीबाग आर.एन. मिश्रा, आरसीएफ बोकारो समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।