झारखंड के प्रशासनिक ढांचे में एक दिलचस्प लेकिन गंभीर असंतुलन लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के जरिए सीधे चयनित आईएएस अधिकारी अपेक्षाकृत तय समयसीमा में शीर्ष पदों तक पहुंच जाते हैं, वहीं राज्य सेवा से पदोन्नति पाकर आईएएस बनने वाले अधिकारियों के लिए सचिव स्तर तक पहुंचना अब भी कठिन लक्ष्य बना हुआ है। राज्य गठन के करीब ढाई दशक बाद भी ऐसे अधिकारियों की संख्या गिनी-चुनी है, जो इस ऊंचे प्रशासनिक पद तक पहुंच सके हैं।
राज्य में आईएएस कैडर की संरचना के अनुसार कुल पदों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पदोन्नति के माध्यम से भरा जाता है। इसमें राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के अलावा डॉक्टर और इंजीनियर जैसे गैर-राज्य सेवा पृष्ठभूमि के अधिकारियों के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है, जिनके लिए अलग से 15 प्रतिशत कोटा तय किया गया है। बावजूद इसके, इन पदों को समय पर भरने में लगातार देरी देखने को मिलती है।
प्रमोशन से आए अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी बाधा उनकी आयु मानी जाती है। आम तौर पर राज्य सेवा के अधिकारी 45 से 50 वर्ष की उम्र के बीच आईएएस कैडर में शामिल हो पाते हैं। इसके बाद सचिव पद तक पहुंचने के लिए आवश्यक सेवा अवधि पूरी करते-करते वे सेवानिवृत्ति की सीमा के करीब पहुंच जाते हैं, जिससे उनका आगे बढ़ना व्यावहारिक रूप से सीमित हो जाता है।
इसके अलावा, पदोन्नति की प्रक्रिया में केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की कमी भी एक अहम कारण है। रिक्त पदों की समय पर गणना न होना और प्रस्तावों को यूपीएससी तक भेजने में देरी के चलते कई मामलों में वर्षों तक पदोन्नति अटकी रहती है। इस मुद्दे पर न्यायपालिका भी पहले राज्य की कार्यशैली पर सवाल उठा चुकी है।
प्रशासनिक रिकॉर्ड भी कई बार अधिकारियों की प्रगति में बाधा बनते हैं। लंबित विभागीय जांच या वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में प्रतिकूल टिप्पणियों के कारण योग्य अधिकारियों को भी समय पर पदोन्नति नहीं मिल पाती। वहीं, आईएएस कैडर में शामिल होने के बाद वरिष्ठता तय करने की जटिल प्रक्रिया भी उनके करियर की रफ्तार को धीमा कर देती है।
कुल मिलाकर, झारखंड में प्रमोटेड आईएएस अधिकारियों के लिए सचिव पद तक पहुंचने का रास्ता कई संस्थागत और प्रक्रियागत चुनौतियों से घिरा हुआ है। यदि इन बाधाओं को दूर करने के लिए ठोस सुधार नहीं किए गए, तो प्रशासनिक संतुलन और अनुभव का समुचित उपयोग भविष्य में भी प्रभावित होता रहेगा।