झारखंड में 9वीं–11वीं की परीक्षा व्यवस्था बदली, अब OMR शीट पर होंगे एग्जाम

झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) ने स्कूली परीक्षा प्रणाली में एक अहम सुधार करते हुए कक्षा 9वीं और 11वीं की परीक्षाओं को OMR शीट आधारित करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव से राज्य के लाखों विद्यार्थियों की परीक्षा प्रक्रिया में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा। नई व्यवस्था के तहत परीक्षाएं पूरी तरह बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) पर आधारित होंगी।
परिषद के अनुसार, OMR तकनीक अपनाने से परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित बनेगी। इसके साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में लगने वाला समय भी कम होगा, जिससे परिणाम अपेक्षाकृत जल्दी जारी किए जा सकेंगे।
OMR प्रणाली से क्या होंगे लाभ
JAC का मानना है कि इस नई प्रणाली से छात्रों को कई स्तरों पर फायदा होगा। इससे मूल्यांकन में मानवीय त्रुटियों की संभावना घटेगी और छात्रों को NEET, JEE जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न से भी परिचय मिलेगा। साथ ही परीक्षा परिणाम समय पर घोषित करना आसान होगा।
सत्र 2025–27 के लिए पंजीयन कार्यक्रम
परिषद ने पंजीयन से जुड़ी तिथियां भी जारी कर दी हैं। बिना विलंब शुल्क के पंजीयन 18 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक किया जा सकेगा। इसी अवधि में चालान जनरेट करने की अंतिम तारीख 2 जनवरी निर्धारित की गई है, जबकि ऑनलाइन शुल्क जमा करने की आखिरी तिथि 5 जनवरी 2026 होगी।
यदि छात्र विलंब शुल्क के साथ पंजीयन कराते हैं, तो यह प्रक्रिया 3 जनवरी से 9 जनवरी 2026 तक चलेगी और शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि 12 जनवरी 2026 तय की गई है। JAC ने साफ किया है कि 2 जनवरी के बाद बनने वाले सभी चालान विलंब शुल्क के अंतर्गत ही मान्य होंगे और तय समय के बाद कोई पंजीयन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विषय चयन और अन्य शर्तें
पंजीयन के दौरान विद्यार्थी केवल उन्हीं विषयों का चयन कर सकेंगे, जिनकी पढ़ाई उनके स्कूल या इंटर कॉलेज में नियमित रूप से हो रही हो और जिनके लिए शिक्षक नियुक्त हों। इसके अलावा जिन छात्रों का पंजीयन सत्र 2021–23 या उससे पहले हुआ था, उन्हें नए सिरे से पंजीयन कराना होगा।
परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि कक्षा 11 की परीक्षा 2026 में उत्तीर्ण करने वाले छात्र ही इंटरमीडिएट परीक्षा 2027 में बैठने के पात्र होंगे।
जवाबदेही तय
JAC ने पंजीयन और परीक्षा आवेदन से संबंधित किसी भी प्रकार की गलती के लिए विद्यालय या महाविद्यालय के प्राचार्य और नामित नोडल पदाधिकारी को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय झारखंड की स्कूली परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।










