झारखंड ATS की संरचना में बड़ा बदलाव, अब CID की निगरानी में चलेगा पूरा अनुसंधान कार्य

झारखंड ATS की संरचना में बड़ा बदलाव, अब CID की निगरानी में चलेगा पूरा अनुसंधान कार्य

झारखंड ATS की संरचना में बड़ा बदलाव, अब CID की निगरानी में चलेगा पूरा अनुसंधान कार्य
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 17, 2026, 1:55:00 PM

 झारखंड पुलिस की आतंकवाद-रोधी इकाई (ATS) के संचालन और जांच संबंधी कार्यों को लेकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया गया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा ने नए निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड अब अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अधीन कार्य करेगी। इसके साथ ही ATS से संबंधित पहले जारी सभी निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है।

जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य में आतंकवादी गतिविधियों की रोकथाम और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में ATS का गठन किया गया था। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचनाओं के तहत ATS को राज्यस्तरीय थाना का दर्जा भी प्रदान किया गया है। बाद में वर्ष 2021 में जारी एक अन्य अधिसूचना के माध्यम से संगठित अपराध से जुड़े मामलों में कार्रवाई के लिए विशेष अधिकार और संरचना को भी स्वीकृति दी गई थी।

नए आदेश के अनुसार, ATS द्वारा दर्ज सभी मामलों की जांच और अनुसंधान प्रक्रिया अब CID की प्रशासनिक एवं संचालन व्यवस्था के अनुरूप संचालित होगी। जांच से संबंधित निर्णय, जैसे किसी मामले का प्रभार सौंपना, अनुसंधान पदाधिकारी और पर्यवेक्षण अधिकारी की नियुक्ति, जांच की समीक्षा तथा प्रगति रिपोर्ट जारी करने की जिम्मेदारी CID नेतृत्व के माध्यम से तय की जाएगी।

हालांकि, आतंकवाद-रोधी अभियानों और सुरक्षा संबंधी विशेष ऑपरेशनों के मामले में ATS की परिचालन भूमिका यथावत रहेगी। ऐसे अभियानों के दौरान ATS के पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक (ऑपरेशन) के मार्गदर्शन में कार्य करेंगे। आदेश में यह भी रेखांकित किया गया है कि इस इकाई का मूल उद्देश्य आतंकवादी नेटवर्क का पर्दाफाश करना, संदिग्ध स्लीपर सेल की पहचान करना, आतंकवादी गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित करना तथा संभावित आतंकी घटनाओं को रोकना है।

DGP के निर्देशों में गोपनीयता को भी विशेष महत्व दिया गया है। ATS को अपने संवेदनशील कार्यों और जांच से संबंधित सूचनाओं के संरक्षण के लिए उच्च स्तर की गोपनीयता बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।

इस प्रशासनिक पुनर्गठन को राज्य में आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की जांच व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और समन्वित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।