झारखंड विधानसभा में DMFT फंड पर बहस, सीमा निर्धारण और खर्च की पारदर्शिता पर उठे सवाल

झारखंड विधानसभा में DMFT फंड पर बहस, सीमा निर्धारण और खर्च की पारदर्शिता पर उठे सवाल

झारखंड विधानसभा में DMFT फंड पर बहस, सीमा निर्धारण और खर्च की पारदर्शिता पर उठे सवाल
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 16, 2026, 12:38:00 PM

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 15वें दिन खनन क्षेत्रों के विकास के लिए इस्तेमाल होने वाले जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड को लेकर सदन में तीखी चर्चा हुई। कई विधायकों ने फंड के उपयोग, इसकी सीमा तय करने के नियम और इसके वास्तविक लाभार्थियों को लेकर सवाल उठाए। सरकार ने इन मुद्दों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार ही नियम तय किए गए हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

विधायक प्रदीप यादव ने खनन क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों के लिए तय की गई दूरी को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष रूप से 15 किलोमीटर और अप्रत्यक्ष रूप से 25 किलोमीटर तक की सीमा निर्धारित किए जाने से कई ऐसे गांव और प्रखंड विकास योजनाओं से बाहर रह जाएंगे, जिन पर खनन गतिविधियों का प्रभाव पड़ता है। उनका कहना था कि इससे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ सकता है।

इस पर जवाब देते हुए मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2024 में भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर ही यह प्रावधान लागू किया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि इस नियम से कुछ क्षेत्र प्रभावित होते हैं तो सरकार उनके हितों को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष रखेगी और आवश्यक संशोधन के लिए पत्र भेजेगी।

फंड के इस्तेमाल पर विपक्ष का सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी डीएमएफटी फंड के उपयोग को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी दूरी तय करने से संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई खनन प्रभावित क्षेत्रों में आज भी सड़क, पेयजल और पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं, जबकि डीएमएफटी राशि का इस्तेमाल डाक बंगले और जिम जैसी सुविधाओं के निर्माण में किया जा रहा है।

मरांडी ने लातेहार जिले में डीएमएफटी फंड से बने एक जिम का उदाहरण देते हुए कहा कि उसका लाभ आम लोगों के बजाय सिर्फ अधिकारियों को मिल रहा है। उन्होंने पूरे मामले की जांच के लिए विधानसभा की एक समिति गठित करने की मांग भी की।

मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डीएमएफटी से जुड़े मामलों की जांच पहले से चल रही है और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि नियमों में बदलाव के लिए केंद्र सरकार से संपर्क किया जाएगा।

विज्ञान शिक्षक की नियुक्ति पर स्पष्टता

सत्र के दौरान विधायक अमित यादव ने विज्ञान शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित प्रश्न उठाया। इस पर शिक्षा मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि विज्ञान शिक्षक के पद के लिए गणित और विज्ञान दोनों विषयों की शैक्षणिक योग्यता आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इन पदों के लिए बीएससी मैथ की योग्यता अनिवार्य रखी गई है और इस संबंध में बनाई गई नियमावली पूरी तरह स्पष्ट है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने की तैयारी

विधायक सरयू राय के प्रश्न के जवाब में मंत्री दीपक बिरूआ ने बताया कि राज्य सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप कार्यक्रम के तहत 101 नवाचार प्रस्तावों की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक जल्द आयोजित होने वाली है।

मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि ग्रामीण प्रशासन को तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से डिजिटल पंचायत की योजना पर भी काम जारी है और अगले दो से तीन महीनों में इसके शुरुआती परिणाम सामने आने की उम्मीद है।