अवैध निर्माणों के नियमितीकरण का रास्ता खुला, BPAMS सिस्टम से आसान होगी भवन वैधता प्रक्रिया

अवैध निर्माणों के नियमितीकरण का रास्ता खुला, BPAMS सिस्टम से आसान होगी भवन वैधता प्रक्रिया

अवैध निर्माणों के नियमितीकरण का रास्ता खुला, BPAMS सिस्टम से आसान होगी भवन वैधता प्रक्रिया
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 14, 2026, 4:14:00 PM

झारखंड सरकार ने बिना स्वीकृत नक्शे के बने मकानों और छोटे भवनों को लेकर बड़ी राहत देने वाला कदम उठाया है। राज्य सरकार ने ‘बिल्डिंग प्लान एप्रुवल मैनेजमेंट सिस्टम’ (BPAMS) पोर्टल लॉन्च किया है, जिसके माध्यम से पात्र भवन मालिक अब अपने निर्माण को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था की शुरुआत नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने की।

सरकार का कहना है कि राज्य के शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे मकान और भवन मौजूद हैं, जिनका निर्माण बिना अधिकृत भवन नक्शा पास कराए कर लिया गया था। ऐसे मामलों में लोगों को भविष्य में संपत्ति हस्तांतरण, बिजली-पानी कनेक्शन, बैंक लोन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था का उद्देश्य इन समस्याओं को कम करना और भवनों को नियमानुसार दर्ज करना है।

हालांकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सुविधा सभी प्रकार के निर्माणों पर लागू नहीं होगी। जिन भवनों का निर्माण सरकारी भूमि पर किया गया है या जो जल स्रोतों, तालाबों के क्षेत्र, निर्धारित पार्किंग स्पेस अथवा सीएनटी और एसपीटी कानूनों का उल्लंघन करते हैं, उन्हें किसी प्रकार की राहत नहीं मिलेगी। इसके अलावा न्यायालय में लंबित विवादित संपत्तियों को भी नियमितीकरण प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।

नियमितीकरण के लिए सरकार ने कुछ स्पष्ट मानक तय किए हैं। केवल वही भवन आवेदन के योग्य होंगे जिनका क्षेत्रफल अधिकतम 300 वर्ग मीटर तक है। भवन की संरचना ग्राउंड फ्लोर के साथ अधिकतम दो मंजिल तक सीमित होनी चाहिए। साथ ही निर्माण की कुल ऊंचाई 10 मीटर से अधिक नहीं हो सकती।

सरकार ने आवेदन प्रक्रिया के लिए सीमित समय भी निर्धारित किया है। भवन मालिकों को आवेदन जमा करने के लिए 60 दिनों की अवधि दी जाएगी। इसके बाद संबंधित मामलों की जांच कर छह महीने के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

नगर विकास विभाग के अनुसार, इस पहल से हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से अपने मकानों की वैधता को लेकर असमंजस में थे। ऑनलाइन पोर्टल के जरिए प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है।