राज्य में बिना स्वीकृत नक्शे के बने मकानों और व्यावसायिक भवनों पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अनधिकृत निर्माणों को वैध कराने के लिए आवेदन जमा करने की समयसीमा 26 जून तक ही रहेगी। इसके बाद किसी भी प्रकार का नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों के विरुद्ध बने भवनों पर कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
सरकार ने हाल ही में “रेग्युलराइजेशन ऑफ अनऑथराइज्डली कंस्ट्रक्टेड बिल्डिंग रूल्स-2026” लागू किया है। इस व्यवस्था के तहत उन भवनों को नियमित करने का अवसर दिया गया है, जिनका निर्माण 31 दिसंबर 2024 तक बिना भवन मानचित्र स्वीकृत कराए किया गया था या फिर स्वीकृत नक्शे से अलग तरीके से निर्माण कराया गया है। यह प्रावधान 300 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर बने भवनों के लिए लागू होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से चल रहे अवैध निर्माणों को नियंत्रित करना और भवन निर्माण नियमों को व्यवस्थित करना है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यह राहत सीमित दायरे में ही दी जा रही है और सभी प्रकार के निर्माणों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
नगर निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माणों की निगरानी तेज करें और निर्धारित समयसीमा के बाद नियम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में बिना अनुमति निर्माण करने वालों पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।
कुछ श्रेणी के निर्माणों को इस योजना से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इनमें सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बनायी गयी इमारतें, तालाब या जल स्रोत क्षेत्र में खड़े भवन, सड़क अथवा सार्वजनिक खुली जगह पर किये गये निर्माण और पार्किंग स्थल को घेरकर बनाई गयी संरचनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही सीएनटी और एसपीटी कानूनों का उल्लंघन कर तैयार भवनों को भी नियमित नहीं किया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वक्फ बोर्ड, धार्मिक संस्थाओं, आवास बोर्ड, स्थानीय निकायों तथा औद्योगिक क्षेत्रों की जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाये गये निर्माण किसी भी स्थिति में वैध नहीं माने जाएंगे।