झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़ी नियुक्ति प्रक्रिया पर दाखिल याचिका की सुनवाई आज झारखंड हाईकोर्ट में हुई। मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने की, जहां अदालत ने राज्य सरकार से कुछ अहम सवाल किए।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पाया कि एकल पीठ के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने केवल चार अभ्यर्थियों के खिलाफ ही लेटर पेटेंट अपील (LPA) दायर की है। इस पर अदालत ने सरकार से पूछा कि जब मामला व्यापक है तो अपील सीमित संख्या में अभ्यर्थियों के खिलाफ ही क्यों दाखिल की गई।
इस प्रश्न के जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि यदि आवश्यकता हो तो इस परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े अन्य अभ्यर्थियों को भी अदालत में याचिका दाखिल करने का अवसर दिया जा सकता है। इस पर कोर्ट ने सुझाव दिया कि संबंधित अभ्यर्थियों तक जानकारी पहुंचाने के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की जाए या जिन लोगों की नियुक्ति हो चुकी है उन्हें नोटिस भेजकर मामले की जानकारी दी जाए, ताकि वे भी अपनी बात रख सकें।
दरअसल, इस मामले की शुरुआत उस याचिका से हुई थी जिसमें बीबीए और बीएसए डिग्री रखने वाले उम्मीदवारों को भी शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की गई थी। एकल पीठ ने इस मांग को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला दिया था।
हालांकि, अदालत के आदेश के बावजूद उसका अनुपालन नहीं होने पर याचिकाकर्ताओं ने अवमानना याचिका भी दायर की थी। इस दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि एकल पीठ के फैसले के खिलाफ एलपीए दायर की जा चुकी है और मामला फिलहाल विचाराधीन है।
सुनवाई के अंत में अदालत ने निर्देश दिया कि इस मामले से जुड़े अभ्यर्थियों और जिन लोगों की नियुक्ति हो चुकी है, उन्हें भी पक्षकार बनाया जाए ताकि सभी संबंधित पक्षों की दलीलें सुनी जा सकें। जेएसएससी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजय पिपरवार ने बताया कि अदालत के निर्देश के अनुसार अब संबंधित अभ्यर्थियों और नियुक्ति प्राप्त उम्मीदवारों को भी मामले में शामिल किया जाएगा।