झारखंड हाईकोर्ट ने चौकीदार नियुक्ति से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने कहा है कि जिन उम्मीदवारों ने निर्धारित सभी शर्तें पूरी कर ली हैं, उन्हें नियुक्ति से वंचित नहीं रखा जा सकता। कोर्ट के इस फैसले से लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
यह मामला दिलीप कुमार यादव और संतोष मुर्मू द्वारा दायर याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष आया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे सभी आवश्यक योग्यता मानकों पर खरे उतरते हैं, फिर भी उन्हें नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि दोनों अभ्यर्थी संबंधित बीट क्षेत्र के निवासी नहीं हैं, इसलिए उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई। इसी आधार को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति प्रक्रिया में क्षेत्रीय आधार को एकमात्र कारण बनाकर योग्य उम्मीदवारों को बाहर करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने अपने निर्णय में पूर्व में दिए गए डिवीजन बेंच के आदेश का भी उल्लेख किया और कहा कि याचिकाकर्ता नियुक्ति पाने के हकदार हैं।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह बिना अनावश्यक विलंब के दोनों अभ्यर्थियों के पक्ष में निर्णय लेते हुए उन्हें नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराए। इस आदेश के बाद संबंधित अभ्यर्थियों और अन्य उम्मीदवारों में सकारात्मक संदेश गया है।
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शादाब बिन हक ने पैरवी की और अदालत के समक्ष विस्तृत दलीलें रखीं। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अदालत ने यह अहम फैसला सुनाया।