हेल्थ इंश्योरेंस के नाम पर 8.40 लाख की ठगी, राजधानी में साइबर गैंग एक्टिव
हेल्थ इंश्योरेंस के नाम पर 8.40 लाख की ठगी, राजधानी में साइबर गैंग एक्टिव
राजधानी रांची में साइबर अपराधियों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। बीते 36 घंटों के दौरान साइबर क्राइम थाना में ठगी के तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें अपराधियों ने लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाकर लगभग 19 लाख रुपये की अवैध निकासी कर ली। सभी मामलों की जांच साइबर पुलिस ने शुरू कर दी है।
पहला मामला हटिया निवासी हन्ना पूर्ति से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, उन्हें एक व्यक्ति का फोन आया जिसने खुद को बैंक अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उनके क्रेडिट कार्ड के साथ हेल्थ इंश्योरेंस सुविधा जुड़ी है, जिसके लिए मात्र पांच हजार रुपये का भुगतान करना होगा। बातचीत के दौरान आरोपी ने व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजा और उसे खोलने के लिए कहा। जैसे ही हन्ना पूर्ति ने लिंक पर क्लिक किया, उनके बैंक खाते से करीब 8.40 लाख रुपये निकल गए। जब दोबारा संपर्क करने की कोशिश की गई तो आरोपी का कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई।
दूसरा मामला बरियातू थाना क्षेत्र के मोरहाबादी स्थित रतन हाइट्स की रहने वाली 66 वर्षीय उषा जैन का है। उन्होंने पुलिस को बताया कि 10 जून से 18 जून के बीच उनके मोबाइल से छेड़छाड़ कर आईडीबीआई बैंक खाते से यूपीआई के जरिए 6.77 लाख रुपये की अनधिकृत निकासी कर ली गई। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान उन्हें बैंक की ओर से किसी भी लेन-देन का न तो एसएमएस मिला और न ही कोई कॉल। पूरे मामले की जानकारी तब हुई जब वह ऑडिट के लिए बैंक स्टेटमेंट निकलवा रही थीं। शिकायत में उन्होंने यह भी कहा कि 5 और 8 जून को उनके मोबाइल नंबर से उनकी जानकारी के बिना एसएमएस भेजे गए थे, जबकि 10 जून को उन्हें केवाईसी अपडेट का संदेश मिला, हालांकि उन्होंने ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं की थी।
तीसरी घटना लोअर बाजार थाना क्षेत्र के बसार टोली निवासी संतोष कुमार वर्मा के साथ हुई। उनके अनुसार, साइबर अपराधियों ने मोबाइल हैक कर इंडसइंड बैंक में मौजूद उनके व्यक्तिगत और एचयूएफ खाते से दो-दो लाख रुपये, यानी कुल चार लाख रुपये निकाल लिए। उन्हें शक तब हुआ जब मोबाइल पर लगातार ओटीपी और कॉल फॉरवर्डिंग से जुड़े संदेश आने लगे। उन्होंने किसी को ओटीपी साझा नहीं किया था और न ही किसी तरह की अनुमति दी थी। संदेह होने पर वे तुरंत बैंक पहुंचे और खातों को फ्रीज कराने का अनुरोध किया। वहीं उन्हें पता चला कि उनके दोनों खातों से पहले ही चार लाख रुपये की निकासी की जा चुकी है। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी या बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें और संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत बैंक तथा साइबर हेल्पलाइन को सूचित करें।