50 साल बाद भी पूरा नहीं हुआ भूमि सर्वेक्षण, HC ने सरकार को लगाई फटकार
50 साल बाद भी पूरा नहीं हुआ भूमि सर्वेक्षण, HC ने सरकार को लगाई फटकार
झारखंड में लंबित भूमि सर्वेक्षण को लेकर दायर मामले की सुनवाई सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई, जहां अदालत ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने पहले दिए गए आदेश का समय पर पालन नहीं होने पर असंतोष व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याद दिलाया कि पूर्व आदेश में राजस्व विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र (एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद निर्धारित समयसीमा के भीतर सचिव की ओर से हलफनामा प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके स्थान पर भूमि अधिग्रहण विभाग के अंडर सेक्रेटरी द्वारा दस्तावेज दाखिल किए गए, जिस पर अदालत ने आपत्ति दर्ज की।
हाईकोर्ट ने यह भी दोहराया कि दशकों बीत जाने के बाद भी राज्य में भूमि सर्वे का कार्य पूरा नहीं होना बेहद चिंताजनक स्थिति है। अदालत ने इस मामले में पहले भी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि करीब 50 वर्षों के बाद भी सर्वेक्षण प्रक्रिया का अधूरा रहना गंभीर विषय है।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मामले में कुछ नए घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्हें रिकॉर्ड पर लाने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। इस अनुरोध पर विचार करते हुए अदालत ने सीमित राहत दी और निर्देश दिया कि 15 जुलाई तक विभागीय सचिव स्वयं शपथपत्र दाखिल करें। साथ ही यह भी कहा कि नए घटनाक्रमों का पूरा विवरण उसी शपथपत्र में शामिल किया जाए।
अब इस मामले की अगली सुनवाई में अदालत सरकार द्वारा दाखिल किए जाने वाले शपथपत्र और भूमि सर्वेक्षण की प्रगति का परीक्षण करेगी।