हजारीबाग भूमि घोटाला मामले में अब कोर्ट करेगी 'लैंड टेस्ट'!
हजारीबाग भूमि घोटाला मामले में अब कोर्ट करेगी 'लैंड टेस्ट'!
हजारीबाग से जुड़े कथित भूमि घोटाला मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से पूरे प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग रखी गई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मामले की प्रारंभिक जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट संबंधित सचिव को सौंप दी थी। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग जांच दल बनाए गए, जिनमें अंचल कार्यालय, राजस्व विभाग और वन विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया।
अदालत को यह भी बताया गया कि जांच के दौरान भूमि हस्तांतरण से जुड़े कई मामलों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले। आरोप है कि सैकड़ों एकड़ वन भूमि का हस्तांतरण बिना वैध सेल डीड के किया गया। मामले से संबंधित विभिन्न पहलुओं को लेकर अब तक करीब आधा दर्जन एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन याचिकाकर्ता का कहना है कि इन सभी मामलों की व्यापक और निष्पक्ष जांच अब तक नहीं हो पाई है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि इसी प्रकरण में दर्ज प्रारंभिक जांच (PE) के आधार पर निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे की गिरफ्तारी भी हो चुकी है, जिससे मामले की गंभीरता स्पष्ट होती है। सभी तथ्यों और प्रस्तुत दस्तावेजों पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने मामले को महत्वपूर्ण मानते हुए दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
यह याचिका शिव शंकर शर्मा की ओर से दायर की गई है, जिसमें पूरे कथित भूमि घोटाले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए CBI जांच का आदेश देने की मांग की गई है।