“वतन को जानो” कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष गंगवार ने दिया 'अनेकता में एकता' का संदेश

“वतन को जानो” कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष गंगवार ने दिया 'अनेकता में एकता' का संदेश

“वतन को जानो” कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष गंगवार ने दिया 'अनेकता में एकता' का संदेश
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Feb 12, 2026, 6:46:00 PM

राँची के लोक भवन में आयोजित कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम 2025-26 के तहत “वतन को जानो” कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने जम्मू-कश्मीर से आए युवाओं को संबोधित किया। इस दौरान अनंतनाग, कुपवाड़ा, बारामुल्ला, बडगाम, श्रीनगर और पुलवामा जिलों से पहुंचे प्रतिभागी कार्यक्रम में शामिल रहे।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अनेक भाषाओं, परंपराओं और वेशभूषाओं वाला देश जरूर है, लेकिन इसकी आत्मा एक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है और ऐसे आदान-प्रदान कार्यक्रम आपसी विश्वास, संवाद और समझ को बढ़ाकर भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करते हैं।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि कश्मीर भारत का मुकुट है। राज्यपाल के अनुसार कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना देश की पहचान का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को उसकी अद्वितीय प्राकृतिक छटा और समृद्ध परंपराओं के कारण “पृथ्वी का स्वर्ग” कहा जाता है।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि भारत हमेशा शांति, संयम और बातचीत के रास्ते पर चला है और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पड़ोसी देश द्वारा समय-समय पर क्षेत्र में अशांति फैलाने की कोशिशें की गई हैं, लेकिन जब भी भारत की संप्रभुता और अखंडता पर हमला हुआ है, देश ने दृढ़ता से जवाब दिया है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में विकास के नए दौर की शुरुआत की बात कही और बताया कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद वहां विकास की संभावनाएं और समान अवसरों के रास्ते खुले हैं।

राज्यपाल ने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा, कौशल, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का मूल आधार बनाएं तथा “विकसित भारत@2047” के लक्ष्य को साकार करने में सक्रिय योगदान दें।

झारखंड की सांस्कृतिक पहचान पर बात करते हुए उन्होंने सरहुल, करमा और सोहराय जैसे प्रकृति आधारित पर्वों का उल्लेख किया और कहा कि राज्य की जनजातीय परंपराएं और युवा ऊर्जा इसे विशिष्ट बनाती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रवास युवाओं की सोच को व्यापक बनाएगा और वे यहां से भाईचारे, सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का सकारात्मक संदेश लेकर लौटेंगे।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने लोक भवन परिसर स्थित उद्यान की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस उद्यान में 100 से अधिक प्रजातियों के गुलाब सहित कई दुर्लभ पौधे और वृक्ष मौजूद हैं। राज्यपाल के अनुसार उद्यान को आम लोगों के लिए खोला गया है और अब तक पांच लाख से ज्यादा लोग इसका भ्रमण कर चुके हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से आए युवाओं को भी उद्यान देखने के लिए प्रेरित किया।