सरकारी खजाने में सेंध! रांची में वेतन मद से करोड़ों की हेराफेरी उजागर, लेखापाल गिरफ्तार

सरकारी खजाने में सेंध! रांची में वेतन मद से करोड़ों की हेराफेरी उजागर, लेखापाल गिरफ्तार

सरकारी खजाने में सेंध! रांची में वेतन मद से करोड़ों की हेराफेरी उजागर, लेखापाल गिरफ्तार
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 15, 2026, 10:36:00 AM

रांची में कोषागार से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसमें सरकारी भुगतान प्रणाली के साथ छेड़छाड़ कर लगभग तीन करोड़ रुपये की अवैध निकासी किए जाने का आरोप है। यह प्रकरण इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ प्रोडक्शन, कांके के दो कर्मचारियों से जुड़ा बताया जा रहा है।

प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच वेतन मद में हुए भुगतानों की समीक्षा के क्रम में अनियमितताएं पकड़ी गईं। आरोप है कि संस्थान के लेखापाल मुनिंदर कुमार और एक अन्य कर्मचारी संजीव कुमार ने कोषागार से भुगतान के लिए उपयोग में आने वाले ‘कुबेर पोर्टल’ में हेरफेर कर राशि को बढ़ाकर अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया।

मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और उपायुक्त के निर्देश पर कार्यपालक दंडाधिकारी मो. जफर ने कोतवाली थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुनिंदर कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरे आरोपी संजीव कुमार की तलाश जारी है।

प्राथमिकी के अनुसार, मुनिंदर कुमार पर आरोप है कि उन्होंने वेतन मद की राशि को बढ़ाकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक के खातों में कुल 1.52 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर की। वहीं संजीव कुमार पर भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाकर करीब 1.41 करोड़ रुपये अपने खाते में जमा कराने का आरोप है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है और अन्य वित्तीय वर्षों या सरकारी कार्यालयों से जुड़े लेनदेन की भी पड़ताल की जा सकती है। ऐसे में फर्जी निकासी की कुल राशि और इसमें शामिल लोगों की संख्या बढ़ने से इनकार नहीं किया जा रहा है।

झारखंड में इससे पहले भी पशुपालन विभाग से जुड़ा बहुचर्चित घोटाला सामने आ चुका है, जिसमें अविभाजित बिहार के समय विभिन्न कोषागारों से बड़े पैमाने पर अवैध निकासी की गई थी। उस मामले में कई बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरे कानून के घेरे में आए थे।

रांची में सामने आए ताजा मामले ने एक बार फिर सरकारी भुगतान प्रणाली की निगरानी और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कुबेर पोर्टल और कोषागार से जुड़े तंत्र की गहन जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह लापरवाही का मामला है या किसी बड़े स्तर की मिलीभगत का परिणाम।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री ने इस तरह के मामलों की जांच सीआईडी से कराने की बात कही थी, लेकिन अब तक इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हो पाई है, जिससे जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।