प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने सरकारों की वित्तीय कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल बजट का आकार बढ़ाना विकास की गारंटी नहीं है। उनके अनुसार असली चुनौती यह है कि आवंटित धनराशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए, तभी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि बजट का मूल्यांकन केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उसके असर को देखते हुए किया जाना चाहिए। दूबे का मानना है कि जब तक वित्तीय प्रावधानों को वास्तविक क्रियान्वयन से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक विकास का दावा अधूरा ही रहेगा।
वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि योजनागत मद में प्रारंभिक रूप से 91,741 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसे संशोधित कर 95,815 करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में राशि खर्च नहीं हो सकी। उनके मुताबिक कुल बजट का करीब एक चौथाई हिस्सा उपयोग में नहीं आ पाया, जो प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यही धनराशि विकास कार्यों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती थी।
आलोक दूबे ने केंद्र और राज्य के वित्तीय संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अपनी योजनाओं का खाका केंद्र से मिलने वाली सहायता को ध्यान में रखकर तैयार करती हैं, लेकिन कई बार केंद्र से फंड जारी होने में देरी या कटौती हो जाती है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर सीधा असर पड़ता है और परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पातीं।
उन्होंने सरकारों को सलाह दी कि बजट बढ़ाने की बजाय पहले अपनी खर्च करने की क्षमता का वस्तुनिष्ठ आकलन करें। दूबे के अनुसार, यदि आवंटित संसाधनों का पूर्ण और सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए, तभी नीतियों का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंच सकेगा।