सुंदरपहाड़ी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शनिवार को सामाजिक जिम्मेदारी का एक सकारात्मक उदाहरण देखने को मिला। जितपुर खनन परियोजना की ओर से उपचाराधीन 86 तपेदिक (टीबी) मरीजों को पौष्टिक खाद्य सामग्री से युक्त फूड बास्केट प्रदान की गई। पहल का उद्देश्य स्पष्ट है, 'दवा के साथ संतुलित आहार उपलब्ध कराकर मरीजों के स्वास्थ्य लाभ की गति तेज करना।'
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी जैसी बीमारी में केवल दवाइयां पर्याप्त नहीं होतीं। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और दवाओं के प्रभाव को बेहतर बनाने के लिए संतुलित भोजन जरूरी है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक मरीज को दाल, चावल, खाद्य तेल, फल सहित आवश्यक खाद्य पदार्थों से भरी टोकरी सौंपी गई।
डॉक्टरों के अनुसार, पर्याप्त पोषण मिलने पर मरीज जल्दी स्वस्थ होते हैं और उपचार के परिणाम भी अधिक प्रभावी होते हैं।
कार्यक्रम के दौरान कंपनी प्रतिनिधियों ने कहा कि टीबी उन्मूलन की दिशा में पोषण एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में भी सामुदायिक स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार से जुड़े ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। इस पहल के जरिए न केवल मरीजों को सहायता मिली, बल्कि क्षेत्र में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश भी गया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों ने इस प्रयास को सराहनीय बताया। उनका मानना है कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत उठाए गए ऐसे कदम राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती देते हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉ. आकाश और जिला समन्वयक दीपक कुमार उपस्थित रहे। वहीं कंपनी की तरफ से प्रदीप अग्रवाल, सदानंद सिंह, संतोष कुमार, जितेंद्र कुमार, आयनदीप और सतीश चंद्र सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस अवसर पर मरीजों को नियमित दवा लेने, पौष्टिक आहार अपनाने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई। फूड बास्केट वितरण से 86 मरीजों को प्रत्यक्ष लाभ मिला और समाज में यह संदेश गया कि बीमारी से जंग केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि सामूहिक सहयोग से जीती जाती है।