झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उद्योग और श्रम विभाग से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा के बीच श्रम एवं उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को सदन के सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है और बड़े पैमाने पर औद्योगिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे आने वाले समय में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
मंत्री ने जानकारी दी कि विश्व आर्थिक मंच के माध्यम से झारखंड को कुल 1 लाख 24 हजार 230 करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। यदि ये प्रस्ताव धरातल पर उतरते हैं तो इससे राज्य में 45 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
उन्होंने आगे बताया कि राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों के कारण निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है और लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की संभावना बन रही है। इस निवेश के माध्यम से करीब 15 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं।
संजय प्रसाद यादव ने कहा कि राज्य में 15 नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की दिशा में भी पहल हुई है। इन परियोजनाओं के जरिए लगभग 29 हजार करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है, जिससे करीब 19 हजार लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकता है।
चर्चा के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। मंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा ने लंबे समय तक राज्य की राजनीति में नकारात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ताकतें केवल वोट बैंक की राजनीति करती हैं और बिहार की राजनीतिक परिस्थितियों का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संदर्भ में टिप्पणी की।
मंत्री ने श्रम विभाग से जुड़ी पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विशेष अभियान चलाकर अब तक 80 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया है। इनमें से 22 बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया जा चुका है, जबकि बाकी बच्चों के नामांकन की प्रक्रिया जारी है।
प्रवासी मजदूरों के हित में उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले 273 प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को कुल 2 करोड़ 85 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा 219 प्रवासी मजदूरों के पार्थिव शरीर को उनके गृह राज्य तक पहुंचाने के लिए 1 करोड़ 6 लाख 55 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई है।
मंत्री ने बताया कि विदेशों में काम करने वाले छह मजदूरों की मृत्यु होने पर उनके परिवारों को 30 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। साथ ही झारखंड राज्य प्रवासी सुलभ योजना के तहत राज्य मुख्यालय में प्रवासी नियंत्रण कक्ष स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा पांच अन्य राज्यों में भी ऐसे नियंत्रण कक्ष बनाए जाएंगे ताकि प्रवासी मजदूरों को सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि विदेश में किसी प्रवासी श्रमिक की मृत्यु होती है, तो उसके पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए रेल या हवाई यात्रा का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। सरकार का उद्देश्य प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराना है।