झारखंड विस में चार निजी विश्वविद्यालय बिल वापस, पर्यटन विकास व निबंधन संशोधन विधेयक 2025 पारित

झारखंड विस में चार निजी विश्वविद्यालय बिल वापस, पर्यटन विकास व निबंधन संशोधन विधेयक 2025 पारित

झारखंड विस में चार निजी विश्वविद्यालय बिल वापस, पर्यटन विकास व निबंधन संशोधन विधेयक 2025 पारित
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Dec 10, 2025, 4:26:00 PM

झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन बुधवार को सदन ने चार निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित विधेयकों को वापस ले लिया, वहीं झारखंड पर्यटन विकास एवं निबंधन संशोधन विधेयक 2025 को मंजूरी दे दी।

वापस लिए गए विधेयकों में शामिल हैं—

  • सी वी रमण ग्लोबल विश्वविद्यालय विधेयक, 2023

  • आरोग्यम इंटरनेशनल विश्वविद्यालय विधेयक, 2023

  • जैन विश्वविद्यालय विधेयक, 2023

  • शाइन नेशनल विश्वविद्यालय विधेयक, 2023

इन बिलों को निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना प्रक्रिया और मानकों में किए गए बदलावों के चलते वापस लिया गया। स्पीकर ने बताया कि 5 दिसंबर से अब तक 12 निवेदन स्वीकार किए गए हैं जिन्हें संबंधित विभागों को भेजा जाएगा।

पर्यटन विधेयक पर हुई विस्तृत चर्चा

राज्य में पर्यटन प्रबंधन को मजबूत करने वाले इस विधेयक पर विभिन्न विधायकों ने अपने सुझाव दिए।

राज सिन्हा ने कहा कि पर्यटन से जुड़े निर्णयों में स्थानीय विधायकों की भूमिका आवश्यक है। उनका कहना था कि कई मामलों में सिर्फ अधिकारियों या उपायुक्तों के पास ही जानकारी रहती है, जबकि स्थानीय प्रतिनिधियों को क्षेत्र की स्थिति अधिक स्पष्ट होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि धनबाद के भटिंडा फॉल की वर्तमान स्थिति दयनीय है और वहां स्थानीय गोताखोरों को सुविधाएं मिलनी चाहिए।

नवीन जायसवाल ने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में पर्यटन स्थल मौजूद हैं, वहां के विधायकों को समिति में शामिल किया जाए ताकि वे अपने अनुभव के आधार पर बेहतर सुझाव दे सकें।

विधेयक में प्रशासनिक इकाई गठन का प्रावधान

विधेयक पर जवाब देते हुए सुदिव्य सोनू ने कहा कि पर्यटन स्थलों पर एक नई प्रशासनिक इकाई बनाई जाएगी, जो वहां आने वाले वाहनों से टैक्स वसूलेगी और स्थानीय प्रबंधन को मजबूत करेगी।

उन्होंने बताया कि संबंधित जिले के उपायुक्त उस इकाई के अध्यक्ष होंगे, अन्य सदस्यों को विभाग नामित करेगा, पर्यटन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने, पार्किंग व्यवस्था और नियम उल्लंघन पर आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है और  प्राधिकरण का संचालन राज्य सरकार सुनिश्चित करेगी। संशोधन के अनुसार, छोटी लेकिन प्रभावी कमेटी पर्यटन स्थलों के बेहतर प्रबंधन में अहम भूमिका निभाएगी।