झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी क्षेत्र से चार आदिवासी बच्चियों को रोजगार दिलाने के बहाने तमिलनाडु ले जाकर बंधक बनाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में चिंता और आक्रोश दोनों देखा जा रहा है। उनका आरोप है कि बच्चियों को काम दिलाने का लालच देकर राज्य से बाहर ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें वापस घर लौटने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, तमिलनाडु में रह रही इन बच्चियों की हालत ठीक नहीं है। बताया जा रहा है कि उनमें से कुछ को पेट दर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो रही हैं। साथ ही बंधक बनाकर रखे जाने की स्थिति के कारण वे बेहद डरी और सहमी हुई हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कुछ लोग आदिवासी परिवारों की सादगी और आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें रोजगार का झांसा देते हैं और फिर उन्हें दूर-दराज के राज्यों में ले जाकर फंसा देते हैं।
मामले की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोगों ने जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सोनाराम सिंकु से संपर्क कर बच्चियों को सुरक्षित वापस लाने की मांग की। ग्रामीणों ने उनसे तत्काल हस्तक्षेप कर प्रशासन को सक्रिय करने की अपील की।
घटना की गंभीरता को देखते हुए विधायक सोनाराम सिंकु ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित किया। उन्होंने क्षेत्र के डीएसपी को मामले की जानकारी देते हुए शीघ्र जांच और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रशासन से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि बच्चियों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया जाए और इस पूरे मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
विधायक ने कहा कि क्षेत्र की बेटियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर बच्चियों को जल्द सुरक्षित वापस लाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
इस दौरान मौके पर कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष ललित कुमार दोराईबुरु, युवा कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष मामूर अंसारी, प्रखंड उपाध्यक्ष सूरज चंपिया, प्रखंड महासचिव प्रदीप प्रधान, रोशन पान, दानिश हुसैन सहित कई स्थानीय कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद थे।