तथ्यपरक आलोचना ही स्वस्थ पत्रकारिता की पहचान: शिवप्रताप शुक्ला

तथ्यपरक आलोचना ही स्वस्थ पत्रकारिता की पहचान: शिवप्रताप शुक्ला

तथ्यपरक आलोचना ही स्वस्थ पत्रकारिता की पहचान: शिवप्रताप शुक्ला
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 12, 2026, 6:13:00 PM

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला ने सोमवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से “राजनीति और मीडिया” विषय पर खुलकर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीति और मीडिया का रिश्ता सहयोगात्मक है और दोनों की भूमिकाएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। उनका मानना है कि इन दोनों का सर्वोच्च उद्देश्य राष्ट्र और जनहित के प्रति निष्ठा होना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि राजनीति शासन की दिशा और नीतियां तय करती है, जबकि मीडिया उन निर्णयों को जनता तक पहुंचाने का माध्यम बनता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गतिविधियों पर मीडिया की सतत निगरानी रहती है और जब राजनीति अपने मूल पथ से भटकती है, तब मीडिया सुधारक की भूमिका निभाते हुए उस पर लगाम लगाने का कार्य करता है। इसी वजह से मीडिया को लोकतंत्र का एक अहम स्तंभ माना गया है।

शिवप्रताप शुक्ला ने पत्रकारिता की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि आलोचना तथ्य आधारित और संतुलित होनी चाहिए। मजबूत तथ्यों के साथ सच सामने लाने से पत्रकारों को हिचकिचाना नहीं चाहिए, लेकिन सनसनी फैलाने के लिए किसी के व्यक्तित्व पर अनावश्यक प्रहार करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पत्रकारिता में कहीं चूक हो जाए तो उसे स्वीकार कर आत्मविश्लेषण करना चाहिए। राज्यपाल ने चिंता जताई कि आज की राजनीति की तरह मीडिया भी विचारधारात्मक खेमों में बंटती जा रही है, जो लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

उन्होंने मौजूदा दौर की पत्रकारिता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब यह पेशा कई बार केवल नौकरी तक सीमित होकर रह गया है। खबरों के साथ विज्ञापनों का दबाव पत्रकारों पर लगातार बना रहता है, जिससे उन्हें राजनीति और नौकरशाही के साथ संतुलन साधने की मजबूरी होती है। इसका असर समाचारों की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्तिगत विचारधाराओं से ऊपर राष्ट्र और समाज का हित होना चाहिए और पारदर्शिता व संवाद के जरिए ही लोकतंत्र को मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री बलबीर दत्त ने कहा कि बाजारवाद के बढ़ते प्रभाव ने मीडिया के मूल उद्देश्यों को प्रभावित किया है, जिससे पत्रकारिता की आत्मा को नुकसान पहुंच रहा है।
विषय की भूमिका रखते हुए वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र ने भारत में पत्रकारिता के लगभग ढाई सौ वर्षों के इतिहास और वर्तमान परिदृश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने मुख्य अतिथि के सार्वजनिक जीवन और योगदान पर भी संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया।

रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी ने संवाद श्रृंखला के उद्देश्य बताते हुए कहा कि इस पहल का मकसद राजनीति, प्रशासन, समाज और मीडिया से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर निष्पक्ष और वैचारिक चर्चा को बढ़ावा देना है, ताकि पत्रकारों के साथ-साथ समाज को भी व्यापक दृष्टि मिल सके।
स्वागत संबोधन में क्लब के सचिव अभिषेक सिन्हा ने कहा कि रांची प्रेस क्लब पत्रकारों के बौद्धिक विकास, पेशेवर मूल्यों की रक्षा और लोकतांत्रिक संवाद को सशक्त करने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर करता रहेगा। धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष बिपिन उपाध्याय ने किया।

इस संवाद कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों और प्रेस क्लब के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे, जिन्होंने चर्चा को गंभीरता और रुचि के साथ सुना।