धुर्वा डैम कैचमेंट में अतिक्रमण मामला: HC के आदेश पर ACB ने संभाली जांच की कमान, मामले को किया टेकओवर

धुर्वा डैम कैचमेंट में अतिक्रमण मामला: HC के आदेश पर ACB ने संभाली जांच की कमान, मामले को किया टेकओवर

धुर्वा डैम कैचमेंट में अतिक्रमण मामला: HC के आदेश पर ACB ने संभाली जांच की कमान, मामले को किया टेकओवर
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Feb 04, 2026, 2:58:00 PM

रांची के धुर्वा डैम के कैचमेंट एरिया में कथित अतिक्रमण और जमीन के अवैध लेन-देन से जुड़े मामले की जांच अब झारखंड एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) करेगी। इस प्रकरण में नगड़ी थाना में दर्ज केस संख्या 21/2026 को ACB ने बुधवार को अपने अधीन लेते हुए औपचारिक रूप से जांच शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

यह कार्रवाई झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद की गई है। इससे पहले भी ACB रिम्स की जमीन पर अतिक्रमण से संबंधित मामले की जांच अपने स्तर पर कर रही है।

नगड़ी थाना में दर्ज हुआ था केस

धुर्वा डैम कैचमेंट क्षेत्र से जुड़े इस विवाद में नगड़ी थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। यह केस हाईकोर्ट के आदेश के बाद और रांची के एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर दर्ज कराया गया था।

हाईकोर्ट ने इस मामले में जमीन के अवैध ट्रांसफर, जमाबंदी दर्ज कराने और लगान रसीद जारी करने की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की पहचान करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि चिन्हित अधिकारियों और दोषियों पर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जमीन खरीद को लेकर दायर हुई थी याचिका

पूरा मामला तब सामने आया जब धुर्वा डैम के कैचमेंट एरिया में कथित रूप से जमीन खरीदने को लेकर एक याचिका अदालत में दाखिल की गई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि जमीन वैध तरीके से खरीदी गई है और वहां मकान निर्माण भी किया गया है।

इसी बीच, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत नगड़ी अंचल अधिकारी (सीओ) ने संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर दिया था। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया था कि संबंधित व्यक्ति सभी दस्तावेजों के साथ नगड़ी सीओ के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखे।

सरकार ने कोर्ट में बताया- जमीन पहले ही अधिग्रहित

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को जानकारी दी थी कि संबंधित भूमि धुर्वा डैम के कैचमेंट एरिया के अंतर्गत आती है और इसे सरकार पहले ही अधिग्रहित कर चुकी है। सरकार के अनुसार, ऐसी जमीन को निजी व्यक्तियों को बेचना कानूनी रूप से संभव नहीं है।