निकाय चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने की कवायद तेज, लेकिन बदले वार्ड और बैलेट सिस्टम बन सकते हैं बड़ी बाधा

निकाय चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने की कवायद तेज, लेकिन बदले वार्ड और बैलेट सिस्टम बन सकते हैं बड़ी बाधा

निकाय चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने की कवायद तेज, लेकिन बदले वार्ड और बैलेट सिस्टम बन सकते हैं बड़ी बाधा
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Feb 14, 2026, 10:28:00 AM

रांची नगर निगम चुनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अगले सात दिनों के भीतर चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा और 23 फरवरी को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान कराया जाएगा। जिला प्रशासन ने इस बार न्यूनतम 60 प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने का लक्ष्य तय किया है, हालांकि पिछले आंकड़े बताते हैं कि यह चुनौती आसान नहीं होगी।

राज्य गठन के बाद बीते 25 वर्षों में रांची नगर निकाय चुनावों में सबसे अधिक मतदान 2018 में दर्ज किया गया था, जो 41.55 प्रतिशत रहा। वहीं 2008 के चुनाव में मतदान प्रतिशत इससे महज 0.5 प्रतिशत कम था। यानी अब तक किसी भी चुनाव में मतदान 42 प्रतिशत के आंकड़े को पार नहीं कर सका।

10.27 लाख मतदाताओं तक पहुंचेगी वोटर स्लिप

रांची के 53 वार्डों में लगभग 10.27 लाख मतदाताओं को मतदाता पर्ची (वोटर स्लिप) उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सभी बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के हर घर तक मतदाता सूची और स्लिप पहुंचाना सुनिश्चित करें। शनिवार से इस अभियान को और तेज किए जाने की योजना है। हालांकि, इस बार मतदान केंद्रों के पुनर्गठन (विखंडन) के चलते बड़ी संख्या में वार्डों की सीमाएं बदली गई हैं, जिससे मतदाताओं को सही मतदान केंद्र तक पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

ऐसे में 

इस चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने की राह में कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं:

वार्ड स्कैनिंग में चूक

मतदान केंद्रों के पुनर्गठन के दौरान कई स्थानों पर वार्डों की जमीनी स्तर पर सही तरीके से स्कैनिंग नहीं हो पाई। इसका असर मतदाता सूची पर पड़ा है और अब सूची में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। चुनाव करीब होने के कारण इनमें सुधार की गुंजाइश भी सीमित रह गई है।

50 हजार से ज्यादा युवा मतदाता सूची से बाहर

यह चुनाव 2024 के विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची के आधार पर कराया जा रहा है। ऐसे में जो युवा हाल ही में 18 वर्ष के हुए हैं, उनका नाम सूची में शामिल नहीं हो पाया। अनुमान है कि 50 हजार से अधिक युवा मताधिकार से वंचित रह सकते हैं।

ईवीएम नहीं, बैलेट पेपर से होगा मतदान

इस बार मतदान ईवीएम की जगह बैलेट पेपर के माध्यम से कराया जाएगा। एक-एक बूथ पर लगभग 1500 मतदाता हैं, ऐसे में बैलेट सिस्टम के कारण वोट डालने में अधिक समय लग सकता है। इससे मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें बनने और लोगों के उत्साह पर असर पड़ने की संभावना है।

35 वार्डों में बदला मतदाताओं का इलाका

करीब 35 वार्डों में मतदाताओं के मतदान क्षेत्र बदल गए हैं। कई लोग अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि उनका नया बूथ या वार्ड कौन सा है। यदि समय रहते जानकारी नहीं मिली तो बड़ी संख्या में मतदाता वोट देने से चूक सकते हैं।

सोसाइटी स्तर पर जागरूकता अभियान कमजोर

लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार सोसाइटी और मोहल्ला स्तर पर मतदाताओं को बूथ तक लाने के लिए कोई बड़ा संगठित अभियान नजर नहीं आ रहा। इससे मतदान प्रतिशत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

संजय सेठ की अपील

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची सांसद संजय सेठ ने मतदाताओं से चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह इंदौर लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर बन रहा है, उसी तरह रांची को भी 2026 तक स्वच्छ और व्यवस्थित शहर बनाने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह बदलाव तभी संभव है जब लोग नगर निगम चुनाव में मतदान करें।

मॉडल बूथ, सेल्फी प्वाइंट और ‘फर्स्ट वोटर’ सम्मान

मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए प्रशासन ने कई नई पहल शुरू की हैं। मोरहाबादी स्थित रेड क्रॉस परिसर के नौ मतदान केंद्रों को मॉडल बूथ के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां विशेष सजावट की जाएगी और सेल्फी प्वाइंट भी बनाया जाएगा, ताकि मतदाता वोट डालने के बाद अपनी भागीदारी को सोशल मीडिया पर साझा कर सकें।

इसके अलावा प्रत्येक मतदान केंद्र पर सबसे पहले मतदान करने वाले नागरिक को ‘फर्स्ट वोटर’ प्रमाण पत्र देकर सम्मानित करने की योजना भी बनाई गई है।

सूत्रों के अनुसार मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए होटल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग सेंटर में छूट जैसी योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग मतदान के लिए बाहर निकलें।

प्रशासन ने सभी मतदान केंद्रों पर सफाई, बिजली और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दिव्यांग मतदाताओं के लिए रैंप और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

डीसी मंजूनाथ भजंत्री का दावा: “हर घर तक पहुंचेगी स्लिप”

रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने कहा है कि रांची और बुंडू नगर निगम क्षेत्र में किसी भी मतदाता का घर छूटने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मतदाताओं तक वोटर स्लिप पहुंचाई जाएगी और बूथों पर मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रशासन की ओर से तैयारियां तेज हैं, लेकिन असली परीक्षा मतदान के दिन होगी। यदि वार्ड परिवर्तन से असंतुष्ट लोग घरों में ही बैठे रह गए तो 60 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य मुश्किल हो सकता है। अब देखना यह है कि रांची के मतदाता इस बार मतदान का नया रिकॉर्ड बनाते हैं या फिर मतदान प्रतिशत पिछली बार की तरह 40 प्रतिशत के आसपास ही सिमट कर रह जाता है।