शुक्रवार रात उत्तर भारत के कई हिस्सों में अचानक धरती कांपने से लोगों में भय का माहौल बन गया। राजधानी दिल्ली, एनसीआर, चंडीगढ़, पंजाब और जम्मू-कश्मीर तक भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसके बाद लोग एहतियातन अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए।
भूकंप का स्रोत अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान की सीमा के पास बताया गया है। रात 9 बजकर 42 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.9 दर्ज की गई। केंद्र भले ही भारत से दूर रहा हो, लेकिन इसके प्रभाव उत्तर भारत के बड़े हिस्से में महसूस किए गए।
दिल्ली-एनसीआर में इस वर्ष यह तीसरी बार है जब भूकंप के झटके दर्ज किए गए हैं। इससे पहले जनवरी महीने में दो बार हल्के झटके आए थे, जिनमें 19 जनवरी को दर्ज भूकंप की तीव्रता 2.8 थी और उसका केंद्र उत्तर दिल्ली क्षेत्र में स्थित था।
भूकंप के जोखिम के लिहाज से देश को भारतीय मानक ब्यूरो ने चार अलग-अलग भूकंपीय जोन में वर्गीकृत किया है। इनमें जोन II को अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है, जिसमें प्रयागराज, औरंगाबाद, बेंगलुरु, दुर्गापुर, भिलाई, भोपाल, हैदराबाद और जयपुर जैसे शहर शामिल हैं। वहीं, जोन IV को उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना गया है, जहां मध्यम से तेज तीव्रता के भूकंप आने की संभावना रहती है। दिल्ली इसी संवेदनशील श्रेणी में आती है, जहां 6 से 6.9 तीव्रता तक के भूकंप की आशंका जताई जाती है।
हालांकि इस भूकंप से किसी बड़े नुकसान की तत्काल सूचना नहीं मिली है, लेकिन अचानक आए झटकों ने लोगों को सतर्क जरूर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को हमेशा सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।