दामोदर घाटी कॉरपोरेशन (डीवीसी) ने झारखंड में बिजली आपूर्ति के बदले आगामी वर्षों के लिए राजस्व आवश्यकता तय करते हुए बिजली दरों में बदलाव का प्रस्ताव झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) को सौंपा है। डीवीसी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2030-31 तक उसे कुल 12,975.18 करोड़ रुपये के राजस्व की जरूरत होगी।
प्रस्ताव में उद्योगों और लाइसेंसी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट बिजली दर में करीब 1.86 से 1.91 रुपये तक बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है। वहीं, घरेलू उपभोक्ताओं को मामूली राहत देने का दावा करते हुए डीवीसी ने उनकी दर में प्रति यूनिट पांच पैसे की कटौती का प्रस्ताव रखा है।
सात जिलों में आपूर्ति
डीवीसी झारखंड के हजारीबाग, रामगढ़, चतरा, कोडरमा, बोकारो, धनबाद और गिरिडीह—इन सात जिलों में बिजली की आपूर्ति करता है। वर्तमान में घरेलू उपभोक्ताओं से लगभग 4.10–4.30 रुपये प्रति यूनिट की दर वसूली जा रही है। नए प्रस्ताव में घरेलू दर 4.25 रुपये प्रति यूनिट तय करने की बात कही गई है।
वर्षवार राजस्व आवश्यकता
डीवीसी ने आयोग को सौंपे दस्तावेज में अलग-अलग वित्तीय वर्षों के लिए अनुमानित राजस्व जरूरत भी बताई है—
2026-27: 9,582.10 करोड़ रुपये
2027-28: 9,824.27 करोड़ रुपये
2028-29: 10,480.59 करोड़ रुपये
2029-30: 12,313.99 करोड़ रुपये
2030-31: 12,975.18 करोड़ रुपये
प्रस्तावित दरों की झलक
डीवीसी के प्रस्ताव के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में बिजली की दरें इस प्रकार होंगी:
घरेलू (एलटी): 4.30 से घटाकर 4.25 रुपये प्रति यूनिट
कमर्शियल (एलटी): 4.30 से बढ़ाकर 4.80 रुपये प्रति यूनिट
उद्योग (11/33/132/220 केवी): 4.20 से बढ़ाकर 6.11 रुपये प्रति यूनिट
लाइसेंसी (33/132 केवी): 4.10 से बढ़ाकर 5.96 रुपये प्रति यूनिट
ट्रैक्शन (132 केवी): 4.10 से बढ़ाकर 5.96 रुपये प्रति यूनिट
अब झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग इस प्रस्ताव पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित कर अंतिम निर्णय लेगा। इससे पहले आयोग उपभोक्ता हितों और डीवीसी की वित्तीय जरूरतों के बीच संतुलन पर विचार करेगा।