29 साल पुराने अलकतरा घोटाले में अदालत का फैसला, सात दोषियों को मिली तीन साल की सजा

29 साल पुराने अलकतरा घोटाले में अदालत का फैसला, सात दोषियों को मिली तीन साल की सजा

29 साल पुराने अलकतरा घोटाले में अदालत का फैसला, सात दोषियों को मिली तीन साल की सजा
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 24, 2026, 11:04:00 AM

करीब तीन दशक पुराने अलकतरा घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए सात आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने प्रत्येक दोषी को तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा के साथ आर्थिक दंड भी लगाया है। वहीं, पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया।

यह मामला वर्ष 1997 का है, जिसे उच्च न्यायालय के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दर्ज किया था। केस नंबर 12/97 के तहत कुल नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा चल रहा था, जिनमें मो. इसहाक, एस.के. दास, एस.एन. अयुगनजेब, एस.सी. प्रसाद, भरत प्रसाद गुप्ता, ट्रांसपोर्टर विनय कुमार सिन्हा, राजकुमार राय, आर.एस. मंडल और आशीष मैयटे शामिल थे। सुनवाई के दौरान दो अभियुक्त; मो. इसहाक और भरत प्रसाद गुप्ता का निधन हो गया, जिसके कारण उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई।

मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक खुशबू जायसवाल ने पक्ष रखा और अदालत में 35 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। अभियोजन के अनुसार, अलकतरा की आपूर्ति के नाम पर तीन अलग-अलग आदेश जारी किए गए थे, लेकिन इन सभी में अनियमितताएं पाई गईं।

जांच में सामने आया कि हल्दिया से राष्ट्रीय राजमार्ग बरही तक अलकतरा की ढुलाई बरौनी मार्ग से होनी थी। हालांकि, वास्तविक आपूर्ति और दस्तावेजों में भारी अंतर पाया गया। पहले ऑर्डर में 491 मीट्रिक टन के बजाय 431 मीट्रिक टन, दूसरे में 195 मीट्रिक टन के स्थान पर 146 मीट्रिक टन और तीसरे में 541 मीट्रिक टन के मुकाबले 505 मीट्रिक टन की आपूर्ति दर्शाई गई। इसके बावजूद पूरी मात्रा की निकासी दिखाकर भुगतान प्राप्त कर लिया गया।

जांच एजेंसियों ने यह भी पाया कि संबंधित ट्रांसपोर्टर ने बरौनी में अनिवार्य रिपोर्टिंग नहीं की और परिवहन से जुड़े फर्जी बिल जमा किए। इन अनियमितताओं के उजागर होने के बाद उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से सीबीआई जांच शुरू हुई, जिसके बाद अब इस लंबे समय से लंबित मामले में अदालत का फैसला सामने आया है।